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जिन शासन की दो परंपराओ का संयुक्त कार्यक्रम
चेन्नई के माधावरम स्थित आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री दीप कुमार जी ठाणा -2 एवं स्थानकवासी संत कमल मुनि (कमलेश) ठाणा -5 के सानिध्य में 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ माधावरम ट्रस्ट द्वारा किया गया। मुनि दीप कुमार जी ने कहा- तीर्थंकर जैन धर्म के मुख्य धुरी होते हैं । 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ऐतिहासिक पुरुष थे । अहिंसा और सत्य की साधना को समाज व्यापी बनाने का श्रेय भगवान पार्श्वनाथ को है। आज के दिन भगवान का वाराणसी में राजा अश्वसेन के महलों में महारानी वामादेवी की कुक्षी से जन्म हुआ। तीर्थंकर बन उन्होंने चातुर्याम धर्म का प्रवर्तन किए ।मंत्र शास्त्र में भी भगवान पार्श्व की स्तुति में विपुल मात्रा में मंत्र और स्तोत्र प्राप्त होते हैं। मुनि श्री के द्वारा "उपसर्गहर स्तोत्र" एवं पार्श्वनाथ से जुड़े विशिष्ट मंत्रो का अनुष्ठान भी करवाया ।कमल मुनि कमलेश ने कहा- तीर्थकर पार्श्वनाथ ने अहिंसा का पावन संदेश दिया। आज देश- दुनिया से चारों ओर हिंसा का साम्राज्य फैला हुआ उसमें अहिंसा के प्रकाश की बहुत जरूरत है। । मुनि काव्य कुमार कुमार जी ने कहा- आज हम एक ऐसे महापुरुष की जन्म जयंती मना रहे हैं जो इस धरती धाम पर एक महामानव के रूप में अवधारित हुए। अक्षत मुनि जी ने मुक्तक एवं गीत का संगान किया। कार्यक्रम में मंगलाचरण तेरापंथ नगर, माधवराम की बहनों ने किया। स्वागत भाषण सुरेश जी रांका ने दिया। आभार ज्ञापन पुखराज जी चोरोडि़या ने किया।