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भगवान महावीर का जीवन विनय से सम्पन्न था
तेरापंथ भवन में उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनि कमलकुमार जी स्वामी के सानिध्य में भगवान महावीर के 2595 वें दीक्षा दिवस का कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुनिश्री कमलकुमारजी ने अपने विचार प्रकट करते हुए फरमाया कि भगवान महावीर ने गर्भकाल में ही यह संकल्प कर लिया था कि जब तक माता पिता जीवित रहेंगे तब तक दीक्षा स्वीकार नहीं करूंगा क्योंकि उस समय आप वीतरागी नहीं थे। माता पिता के स्वर्गवास के पश्चात आपने बड़े भाई से दीक्षा की अनुमति मांगी पर अनुमति नहीं मिलने से आपने दो वर्ष घर में रहकर ही साधना की इससे यह ज्ञात होता है कि वे अपने बड़े भाई के प्रति कितने विनम्र थे। विनम्र व्यक्ति परिवार समाज में प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है वर्तमान में विनम्रता के अभाव मे सर्वत्र अशांति दिखाई दे रही है घर परिवार समाज में तनाव टकराव अलगाव बढ़ता जा रहा है।
मुनिश्री ने फरमाया कि भगवान के दीक्षा दिवस पर सभी विनम्रता का अभ्यास करें जिससे घर घर मे अमन चैन का वातावरण बन सके। भगवान महावीर ने बेले की तपस्या में दीक्षा स्वीकार की। दीक्षा के साथ पांच संकल्प किये- 1. अधिकतर मौन रहेगा 2. अधिकतर ध्यान का अभ्यास करूंगा 3.कर पात्र रहूंगा 4 भोजन आदि के लिए किसी का अभिवादन नहीं करूंगा 5 अप्रतीतिकर स्थान में निवास करूंगा। आपने इनका दृढ़ता से पालन किया। भगवान के दीक्षा कल्याणक पर आज सर्वत्र जैन समाज में आयोजन किये जाते है इस अवसर पर G.S.T. के कमिश्नर कांतिलाल जसोल ने भी अपने विचारों से सबको लाभान्वित किया।