भक्तामर अनुष्ठान का आयोजन

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गांधीनगर, नई दिल्ली।

भक्तामर अनुष्ठान का आयोजन

बहुश्रुत मुनि उदितकुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में आयोजित भक्तामर अनुष्ठान अत्यंत ही आध्यात्मिक व दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। मुनिश्री के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्र के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तेयुप गांधीनगर दिल्ली के कर्मठ अध्यक्ष क्रांति बरड़िया ने पधारें हुए सभी पदाधिकारियों का व अनुष्ठान में उपस्थित श्रावक श्राविका समाज का अपने व्यक्तव्य से स्वागत व अभिनंदन किया।
मुनिश्री ने श्रावक श्राविका समाज को भक्तामर का महत्व बताते हुए फरमाया की आचार्यमानतुंग द्वारा रचित यह स्त्रोत सभी स्रोतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। श्वेतांबर और दिगंबर दोनों परंपराओं में इसका बहुत महत्व है इसका एक एक श्लोक मंत्र से ओतःप्रोत व बहुत ही चमत्कारी है। भक्तामर स्त्रोत की रचनाकाल सातवीं शताब्दी के लगभग है श्वेतांबर परंपरा में 44 व दिगंबर परंपरा में 48 श्लोकों की मान्यता है। हजारों हजारों श्रावक श्राविका समाज इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं मुनिश्री ने कहा कि स्रोत के साथ अर्थज्ञान भी होना जरूरी है। तभी हम इस स्रोत से कष्टों का निवारण कर सकते हैं। मुनिश्री ने अपने उद्बोधन में भक्तामर के गूढ़ रहस्यों का मार्मिक विवेचन करते हुए सभी श्रावक श्राविका समाज को आत्मजागृति का संदेश दिया।
मुनिश्री व उनके सहयोगी संत मुनि रम्यकुमार जी व मुनि ज्योतिर्मय कुमार जी के मुखारबिंद से अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस अनुष्ठान में प्रयाप्त जानकारी के अनुसार 157 जोड़े एवं सिंगल मिलाकर कुल 423 से अधिक श्रावक श्राविका समाज सहभागी बने यह अपने आप में एक अनुपम अध्याय है। विशेष साधुवाद सयोंजक श्री विक्रम पारख का जिनके श्रम, समर्पण और संगठन ने इस अनुष्ठान को दिव्यता के शिखर तक पहुँचाया।
सभी सहभागी श्रावक-श्राविका समाज का आभार जिनके उत्साह और श्रद्धा ने यह अनुष्ठान अविस्मरणीय बना दिया। भक्तामर स्त्रोत अनुष्ठान के प्रायोजक राजेंद्रमल भूपेंद्र सौरभ सिंघवी का तेयुप गाँधीनगर दिल्ली ने आभार व्यक्त किया। इस अनुष्ठान में अभातेयुप प्रवृति सलाहकार जतन श्यामसुखा की गरिमामयी उपस्थिति रही। आभार ज्ञापन अनुष्ठान सयोंजक विक्रम पारख ने किया। भक्तामर अनुष्ठान का कुशल मंच संचालन मंत्री प्रकाश सुराणा ने किया।