भिक्षु भक्ति व तप की शक्ति से आत्म कल्याण संभव

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भिक्षु भक्ति व तप की शक्ति से आत्म कल्याण संभव

आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान में आयोजित भिक्षु भक्ति एवं मुनि प्रतीककुमारजी भद्रोतर तप अनुमोदना का कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर सूरत (गुजरात) से सुप्रसिद्ध संगायिका राजुल सुराणा ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। तप अनुमोदना के अन्तर्गत मुनि धर्मेशकुमारजी ने कहा- तेरापंथ धर्मसंघ अनेक साधु-साध्वियां ने तपस्या के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए है। भिक्षु तपोभूमि में मुनि प्रतीककुमार ने यह तप करके कर्म निर्जरा के साथ कीर्तिमान रच दिया है। तप-जप-ध्यान-साधना के द्वारा कर्मों का क्षयोपशमन होता है और व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर हो जाता है। मुनि चैतन्य कुमार ‘अमन’ ने कहा- भिक्षु भक्ति और तप की शक्ति से आत्म कल्याण संभव है।
तप साधना में शरीर बल के साथ मनोबल, संकल्पबल और संयमबल भी अपेक्षित है। तपस्या मोक्ष का राजमार्ग है। तेरापंथ धर्मसंघ भद्रोतर तप करने वालों में इनका दूसरा नम्बर है। तपस्या के साथ क्रोधशमन और अहंकार विजय प्राप्त करना अपेक्षित है। अन्यथा तपस्या करना सार्थक नहीं होती। इस अवसर पर मुनि गिरिशकुमारजी संस्थान के अध्यक्ष निर्मल श्रीश्रीमाल, मंत्री मर्यादाकुमार कोठारी ने तपस्वी की अनुमोदना में अपने विचार व्यक्त किए।