करुणा की मूर्ति थी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी

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करुणा की मूर्ति थी साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी

भीलवाड़ा।
जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की विशिष्ट विभूति, शासनमाता साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी की स्मृति सभा का आयोजन आर0सी0 व्यास कॉलोनी में शासनश्री मुनि हर्षलालजी ‘लाछूड़ा’ की सन्निधि में हुआ।
स्मृति सभा का शुभारंभ शासनश्री मुनि हर्षलाल जी स्वामी के महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। तेरापंथ महिला मंडल के द्वारा गीत प्रस्तुत किया।
शाासनश्री मुनि हर्षलाल जी स्वामी ने कहा कि शासनमाता महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी की महत्ता इसी बात से प्रकट होती है कि स्वयं आचार्यश्री महाश्रमण जी ने एक दिन में 47 किमी तक का विहार करके दर्शन देने दिल्ली पहुँचे। शासनश्री ने कहा कि साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी एक प्रभावशाली वक्ता और करुणा की मूर्ति थी।
मुनि पारस कुमार जी ने कहा कि साध्वीप्रमुखाश्री ने तेरापंथ धर्मसंघ को अविस्मरणीय सेवाएँ प्रदान की। तीन आचार्यों के सान्निध्य में वे 50 से भी अधिक वर्षों तक साध्वीप्रुखा के पद पर रही।
मुनि आनंद कुमार जी ने उनकी स्मृति में कहा कि शासनमाता एक ऐसी विलक्षण कीर्ति की धनी रही हैं, जिनमें आध्यात्मिक निष्ठा, गुरु निष्ठा और संघ निष्ठा की त्रिवेणी निरंतर प्रवाहित होती रही है। दीक्षा के 50वें वर्ष की संपन्नता पर लाडनूं में अमृत महोत्सव के दौरान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आपको ‘शासनमाता’ का अलंकरण दिया।
मुनि शांतिप्रिय जी ने साध्वीप्रमुखाजी के बारे में कहा कि शासनमाता ‘माँ’ का प्रतीक है, उनका व्यक्तित्व व कर्तृत्व तेरापंथ धर्मसंघ के लिए बेजोड़ रहा है। इस अवसर पर अनेक श्रावकों व श्राविकाओं ने भी अपने भाव व्यक्त किए। बाल कलाकार दक्ष बड़ोला व हिरेन चोरड़िया ने मधुर गीतिका प्रस्तुत की। संघगायक संजय-विनीता भानावत, वर्षा बाफना व अपेक्षा पामेचा ने गीतिका प्रस्तुत की। तेरापंथ सभा अध्यक्ष भेरूलाल चोरड़िया, तेयुप अध्यक्ष संदीप चोरड़िया, टीपीएफ अध्यक्ष राकेश सूतरिया, तेममं अध्यक्षा मीना बाबेल, अणुव्रत समिति अध्यक्ष आनंदबाला टोड़रवाल व प्रकाश सूतरिया, सुशील आच्छा, अनिल चौधरी, लक्ष्मी लाल झाबक, चंद्रकांता चोरड़िया, अंजना रांका ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। मंच का संचालन एवं आभार व्यक्त आचार्य भिक्षु सेवा संस्थान के मंत्री दिलीप रांका ने किया।