नवनियुक्त साध्वीप्रमुखा अभ्यर्थना

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साध्वी डॉ0 मंगलप्रज्ञा

नवनियुक्त साध्वीप्रमुखा अभ्यर्थना

लो भक्ति भरा अभिनदंन।
साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभा चरणों में शत-शत वंदन।।

वर्धापन की शुभ बेला में हर्षित दशों दिशाएँ।
गौरवशाली भव्य भाल पर कुंकुम तिलक लगाएँ।
चढ़ो सदा तुम प्रगति शिखर पर, भावों के शुभ स्पंदन।।

आरोहण का सुखकर अवसर गुरु कृपा से पाया।
तेरापंथ संघ भवन में अद्भुत, खुशियाँ लाया।
स्वीकार करो हे सतिशेखरे! श्रद्धामय अभिवंदन।।

शासनमाता साध्वीप्रमुखा पद पर हुई सुशोभित।
लिखो ऋचाएँ नव्य भव्य इतिहास बने स्वर्णांकित।
चिहुं दिशि फैले यश गौरव भावों का मलयज चंदन।।

भाग्योदय से भैक्षवशासन गुरु महाश्रमण का साया।
पूरण पुण्याई से सतिवर! साध्वी प्रमुखा पद पाया।
सरदारशहर की पुण्यधरा गुलजार बना गण उपवन।।

मंगल भावों का उपहार सलौना आज सजाकर लाए।
श्रमणीगण शंृगार सतिवर! आशीर्वर हम चाहें।
उसी दिशा में बढ़ें कदम जो मिले हमें निर्देशन।।
प्रमुदित पुलकित साध्वी परिकर विनतभाव है अर्पण।।

लय: जहाँ डाल-डाल---