युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की षष्टिपूर्ति के अवसर पर

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साध्वी जिनयशा

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की षष्टिपूर्ति के अवसर पर

महितल में सुरभित है पुलकन,
युगप्रधान का है अभिनंदन।।
स्वर्णिम भोर समुज्ज्वल किरणें,
प्रक्षालन करती पुण्य चरण।
मिटा रहे हो तुम तिमिर सघन,
युगप्रधान का है अभिनंदन।।

प्रभु वाणी रसपान कराते,
नए नए इतिहास रचाते।
जन-मानस के संताप हरण,
युगप्रधान का है अभिनंदन।

कोमल किसलय सा ये जीवन,
देता मन को नव संजीवन।
फौलादी साहस मनभावन,
युगप्रधान का है अभिनंदन।।

सहज सरल आकर्षण पावन,
शासन माता का अभिवादन।
पुलकित है शासन का कण-कण,
युगप्रधान का है अभिनवन।।