युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की षष्टिपूर्ति के अवसर पर

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साध्वी संवरयशा

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की षष्टिपूर्ति के अवसर पर

युगप्रधान महाश्रमण को वंदन शत-शत बार
नेमानन्दन का अभिनन्दन करते बारम्बार

ओ युगनायक! शक्ति प्रदायक! उजली तेरी जीवन चद्दर,
बांट रहे नैतिकता का अमृत, भरते जो रीती गागर।
अहिंसा का घोष मंगल, बज रही वीणा की झंकार।।

शासन के श्रृंगार, मुझे भी दो ऐसा वरदान,
बढ़ती-चढ़ती रहूं निशदिन, कर पाऊं अपनी पहचान।
अभ्यर्थना में है समर्पित, भक्तिमय उद्गार।।

श्रद्धा और समर्पण का नित चढ़े मजीठी रंग,
श्रम बूंदों से अभिसिंचित बजे साधना चंग।
पौरुष की तस्वीर तुम्हीं हो, कर दो मेरी नैय्या पार।।