आरती

रचनाएं

समणी आदर्शप्रज्ञा

आरती

ऊँ जय नेमानंदन
तव चरणों गुरूवर, निशदिन करूं वंदन।।
ऊँ जय नेमानंदन

नाम है मंगलकारी, संकटहारी है। हो प्रभु.....
सुखकारी, भयहारी, महिमा भारी है।।
ऊँ जय नेमानंदन

जाप जपो गुरूवर का, कारज सब सारै। हो गुरु.....
तन से मन से ध्यावै, भवसागर तारे।।
ऊँ जय नेमानंदन

करूणा के सागर हो, करूणा रस बरसै। हो प्रभु.....
तव शुभ दृष्टि पाकर, सबके मन हरसै।।
ऊँ जय नेमानंदन

चरण शरण मंे आई, तुझ से क्या मांगू। हो प्रभु.....
समता भाव बढे बस, यह आशिष चाहूं, वीतराग बन जाऊँ।।
ऊँ जय नेमानंदन