अतिन्द्रि ज्ञान के धनी थे आर्चाश्री महाप्रज्ञ

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अतिन्द्रि ज्ञान के धनी थे आर्चाश्री महाप्रज्ञ

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आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी कीर्तिलताजी के सान्निध्य में 104वें महाप्रज्ञ जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या मंडल के द्वारा मंगलाचरण से हुआ। साध्वी कीर्तिलताजी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आचार्यश्री महाप्रज्ञजी बूंद से सागर को भरने वाले अतिशय व्यक्तित्व के धनी, अज्ञ से प्रज्ञ बनने वाले अतिन्द्रि; ज्ञान के धनी थे। आपने फरमाया खुले आकाश में जन्म होने वाले शिशु का जीवन निर्मल निश्छल व मां के दूध की तरह स्वच्छ था। आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने कभी नहीं कहा कि भाग्य हाथ की रेखाओं में है, उन्होंने कहा भाग्य पुरुषार्थ में है। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि जब मैं पूरी तरह थक जाता हूं, तब महाप्रज्ञ की पुस्तक के दो पृष्ठ पढ़ता हूं तो तरोताजा बन जाता हूं।
साध्वी शांतिलताजी, साध्वी पूनम प्रभाजी व साध्वी श्रेष्ठप्रभाजी के साथ कन्या मंडल की कन्याओं ने आकर्षक कार्यक्रम किया। साध्वी श्रेष्ठप्रभाजी ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा कि जिसने कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा, वे आज स्कूल के पाठ्यक्रम में पढ़े जा रहे हैं। गुरु तुलसी के विद्यालय में पहुंचकर आचार्य महाप्रज्ञ ने अपनी मेधा को उत्कृष्ट रूप में उजागर कर दिया। कार्यक्रम में सभा अध्यक्ष देवेंद्र मेहता, सभा मंत्री ज्ञानेश्वर मेहता, तेयुप अध्यक्ष पवन कच्छारा, अणुव्रत समिति अध्यक्ष दलीचंद कच्छारा, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष मीना गेलड़ा, उपासक शांतिलाल छाजेड़, महेंद्र बोहरा, नरेंद्र श्रीश्रीमाल, सुधा मेहता, गजरा बाई बापना, शकुंतला देवी भंडारी, अनीता छाजेड़, रीना रांका, रेणू छाजेड़, सुरेखा ओस्तवाल, लीला चोरड़िया, अंजलि पितलिया, आयुषी हिंगड़, सिद्धि पामेचा, प्रेक्षा श्रीश्रीमाल आदि ने संभाषण व सुमधुर गीतिकाओं के द्वारा अपने भाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में श्रावक समाज की अच्छी उपस्थिति रही।