जयाचार्य का 143वां निर्वाण दिवस मनाया

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जयाचार्य का 143वां निर्वाण दिवस मनाया

सिकन्दराबाद
तेरापंथ भवन, सिकन्दराबाद में साध्वी डॉ0 मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में श्रीमद् जयाचार्य का स्वर्गारोहण दिवस मनाया गया। इस पर साध्वीश्रीजी ने कहा- ‘एक शताब्दी के विरोध के पश्चात् श्रीमद्‌ जयाचार्य ने तेरापंथ का नवनिर्माण किया। परम पूज्य जयाचार्य ने तेरापंथ को अपनी प्रज्ञा से संबुद्ध बनाया। वे व्यवस्था पुरुष, अनुशासन पुरुष और मर्यादा पुरुष थे। तेरापंथ के प्रभावक आचार्यों की परम्परा में उनका नाम तेजस्वी सूर्य की तरह चमकता है। ऐसा लगता है, जिनशासन की प्रभावना के लिए ही उनका अवतरण हुआ था। जन्म से ही दैविक सहयोग सम्बधी उनके जीवन से अनेक घटनाएं जुड़ी हुई हैं, जिनका गौरवशाली इतिहास रहा है।’
साध्वीश्रीजी ने कहा- ‘जिनशासन के प्रखर व्यक्तित्व के रूप में उनको हम प्रणाम करते हैं। जयपुर में बनी श्रीमद् जयाचार्य की समाधि भी चमत्कारी है, शक्तिशाली है, देवसेविक समाधि है। जयाचार्य के द्वारा संघ को विकास का शिखर प्राप्त हुआ है। वे एक मंत्रवादी, मंत्र साधक, सिद्धिप्रदायक, समयज्ञ आचार्य थे। उनकी पवित्र विचारधारा ने लाखों-लाखों लोगों का उद्धार किया। उनके प्रति जन-जन में अगाध श्रद्धा भाव है। जयाचार्य का नाम-स्मरण ही विघ्न विनाशक और संकट निवारक है। ऐसे युग पुरुष, प्रज्ञा पुरुष को हम श्रद्धासिक्त नमन कर रहे हैं।’
साध्वी शौर्यप्रभाजी ने कहा- ‘जयाचार्य का व्यक्तित्व अनेक विशेषताओं का समवाय था। उनका अगाध समर्पण, श्रुत साधना और श्रुत सम्पदा प्रणम्य है। ऐसे महान व्यक्तित्व को सदियां याद करेगी।’ साध्वीवृंद के द्वारा आचार्यश्री महाप्रज्ञजी द्वारा रचित जयाचार्य अष्टकम् से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। साध्वीवृंद ने सामूहिक गीत का संगान कर अपने श्रद्धा भाव समर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन साध्वी सिद्धियशाजी ने किया।