पर्युषण पर्वाराधना के कार्यक्रम

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पर्युषण पर्वाराधना के कार्यक्रम

बोरावड़
बोथरा बास स्थित तेरापंथ भवन में साध्वी प्रांजलप्रभाजी के सान्निध्य में जैन धर्म के प्रमुख पर्व पर्युषण महापर्व का अष्ट दिवसीय आयोजन हुआ। प्रतिदिन साध्वीश्रीजी के सान्निध्य में व्यवस्थित व्याख्यान का क्रम चला, जिसमें भगवान महावीर के 27 भवों का सरस शैली में वर्णन साध्वीश्रीजी द्वारा किया गया। प्रतिदिन के निर्धारित दिवसों पर साध्वीवृंद द्वारा वक्तव्य व गीत के माध्यम से प्रेरणा दी गई।
क्षमायाचना दिवस के अवसर पर साध्वी प्रांजलप्रभाजी ने सभी धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुये फरमाया कि आठ दिवस पूर्व हमने पर्युषण के हिमालय पर आरोहण करना प्रारंभ किया। आठ दिवस को अलग-अलग दिवस के रूप में मनाकर आत्म विकास के विविध आयामों को अपनाकर अध्यात्म की साधना की। जप, ध्यान, स्वाध्याय, सामायिक, पौषध आदि के द्वारा शिखर की ओर निरंतर बढते रहे और सांवत्सरिक प्रतिक्रमण कर हिमालय के सर्वाेच्च शिखर को हासिल कर लिया। अब समय आ गया है, मैत्री की विजय पताका को शिखर पर फहराने का। आज के पर्व को स्वयं की भूलों की क्षमा मांग और दूसरों की गलती को माफ कर मनाया जाता है। साध्वी गौतमप्रभाजी ने आत्मावलोकन करने की प्रेरणा देते सुमधुर गीत से वातावरण को संगीतमय बना दिया। क्षमायाचना पर्व के अवसर पर सामूहिक क्षमायाचना के क्रम में तेरापंथी सभाध्यक्ष रिखबचंद भंडारी, मंत्री रायचंद बोथरा, तेरापंथ युवक परिषद् अध्यक्ष विकास चौरड़िया, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा हर्षा चौरड़िया ने समस्त श्रावक समाज से क्षमायाचना की।