आध्यात्मिक विकास का पर्व है पर्युषण

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आध्यात्मिक विकास का पर्व है पर्युषण

कोटा
शासनश्री साध्वी धनश्रीजी ने कहा कि पर्युषण पर्व सब पर्वाें में महान पर्व है। इस पर्व पर व्यक्ति बाहर से भीतर की ओर लौटता है। उन्होंने इस अवसर पर अधिक से अधिक त्याग, तप, ध्यान, स्वाध्याय आदि के द्वारा आत्मा को निर्मल बनाने की प्रेरणा दी।
खाद्य संयम दिवस- उत्तराध्ययन सूत्र के 22वें अध्याय का वाचन हुआ। आचार्य तुलसी द्वारा रचित समता रो समंदर आख्यान का वाचन हुआ। देवकी के छह पुत्रों का वर्णन बहुत ही मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया। साध्वी शीलयशाजी, साध्वी सलिलयशाजी, साध्वी विदितप्रभाजी ने खाद्य संयम पर प्रस्तुति दी। स्वाध्याय दिवस- स्वाध्याय का महत्व बताया गया। भगवान महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्ययन और विपाक सूत्र में से संबंधित विषय का वाचन किया गया। साध्वीश्री द्वारा हाजरी का वाचन किया गया। संघीय मर्यादा एवं अनुशासन की जानकारी दी। ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं के द्वारा मंगलाचरण किया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम संगीत संध्या का रहा ।
सामायिक दिवस- महावीर के भवों का वर्णन साध्वी शीलयशाजी द्वारा बताया गया। अभिनव सामायिक का क्रम रहा, जिसमें सामायिक के अंतर्गत ध्यान, जप, स्वाध्याय आदि का क्रम रहा। मंगलाचरण तेयुप सदस्यों द्वारा किया गया। शासनश्री साध्वी धनश्रीजी द्वारा 22वेंअध्ययन के अंतर्गत आगे का वर्णन बताया गया। समता रो समंदर आख्यान का वाचन हुआ। रात्रिकालीन कार्यक्रम ‘आचार्य महाश्रमण के पुरुषार्थ की कहानी सुनाएं’ विषय पर अनेक भाई-बहिनों ने गीत, वक्तव्य आदि के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। संचालन साध्वी सलिलयशाजी ने किया। साध्वी शीलयशाजी ने मोहन से मुदित और मुदित से महाश्रमण तक का जीवन वृतांत बताया। साध्वी विदितप्रभाजी ने कविता के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। वाणी संयम दिवस- साध्वी शीलयशाजी द्वारा भगवान महावीर के भवों का वर्णन बहुत ही रोमांचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। शासनश्री साध्वी धनश्रीजी ने उत्तराध्ययन के आगे के क्रम को बढ़ाया। चंदन की चुटकी आख्यान का वाचन हुआ। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों द्वारा किया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम का विषय ‘जानंे-पहचानें तीर्थंकरों का जीवन दर्शन’ विषय पर अनेक भाई-बहिनों ने अपनी प्रस्तुति दी।
अणुव्रत चेतना दिवस- शासनश्री साध्वी धनश्रीजी ने उत्तराध्ययन के 22वें अध्ययन के अंतर्गत अरिष्ठनेमी की वैराग्य भावना और वीरता का वर्णन किया। चंदन की चुटकी के आख्यान क्रम को आगे बढ़ाया गया। मंगलाचरण अणुव्रत समिति के सदस्यों द्वारा किया गया। शासनश्रीजी द्वारा अणुव्रत के 11 नियमों का उच्चारण सहित संकल्प करवाया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम ‘विविध भारती’ विषय पर अनेक भाई बहिनों ने गीत, कविता, कहानी आदि की प्रस्तुतियां दी। संचालन धर्मचंद जैन ने किया। जप दिवस- साध्वी शीलयशाजी ने भगवान के आगे के भवों का वर्णन विस्तार से बताया। शासनश्रीजी ने उत्तराध्ययन के 22वें अध्याय एवं चंदन की चुटकी आख्यान क्रम को आगे बढ़ाया। शासनश्रीजी ने जप की महत्ता का वर्णन किया। अधिक से अधिक जप करने की प्रेरणा दी। मंगलाचरण कन्या मंडल द्वारा किया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम ‘तेरापंथ की यशस्वी साध्वी परंपरा’ विषय पर साध्वियों द्वारा अनेक साध्वियों का जीवन वृतांत सुनाया गया।
ध्यान दिवस- भगवान महावीर के भवों का वर्णन किया गया। साध्वीश्रीजी ने अधिक से अधिक ध्यान करने की प्रेरणा दी। मंगलाचरण प्रेक्षा वाहिनी की बहनों द्वारा किया गया। चंदन की चुटकी आख्यान क्रम को आगे बढ़ाया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम अंताक्षरी के अंतर्गत अनेक भाई-बहिनों ने भाग लिया।
संवतसरी महापर्व- शासनश्री साध्वी धनश्रीजी ने कहा कि यह पर्व आध्यात्मिक विकास का पर्व है। संवत्सरी पर्व का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि कमजोर व्यक्ति न क्षमा मांग सकता है न क्षमा कर सकता है। यह पर्व मन की चिकित्सा का पर्व है।
क्षमापना दिवस- श्रावक समाज ने आचार्य प्रवर से क्षमायाचना की। तत्पश्चात साध्वी प्रमुखाश्रीजी, मुख्य मुनिश्री, साध्वीवर्याजी, विराजित साध्वीवृंद एवं समस्त चारित्रात्माओं से क्षमायाचना करते हुए परस्पर एक दूसरे से क्षमायाचना की। शासनश्री साध्वी धनश्रीजी ने क्षमापना दिवस के महत्व को उजागर करते हुए इस दिन के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। तेरापंथी महासभा से गजराज बोथरा, तेरापंथी सभा अध्यक्ष संजय बोथरा, मंत्री धरमचंद जैन, पूर्व अध्यक्ष रतनलाल जैन, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष मंजू सुराणा, मंत्री सुप्रिया हीरावत, अणुव्रत समिति अध्यक्ष रविप्रकाश बुच्चा, मंत्री भूपेंद्र बरड़िया, तेयुप अध्यक्ष आशीष सुराणा, मंत्री कमलेश जैन ने क्षमायाचना के स्वर प्रस्तुत किए।