143वां जयाचार्य निर्वाण दिवस मनाया गया

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143वां जयाचार्य निर्वाण दिवस मनाया गया

बीदासर
समाधि केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी रचनाश्रीजी के सान्निध्य में 143वां जयाचार्य निर्वाण दिवस मनाया गया। इस अवसर पर साध्वीश्रीजी ने फरमाया कि तेरापंथ के चतुर्थ आचार्य श्रीमद्जयाचार्य अध्यात्म वेत्ता थे, तत्व वेत्ता थे। वे एक चमत्कारिक पुरुष थे। जयाचार्य की शरीर संरचना में अग्नितत्व की प्रधानता थी। जयाचार्य का पदारोहण कार्यक्रम दो बार मनाया गया। अग्नितत्व-अनुशासन का प्रतीक है। दो बार पदारोहण मनाने के पीछे कारण था अनुशासन का प्रयोग और दोनों ही कार्यक्रम बीदासर में मनाये गये।
साध्वी जयन्तयशाजी और शासनश्री साध्वी किरणमालाजी ने गीत की प्रस्तुति दी। साध्वी सन्मतिश्रीजी, साध्वी लब्धियशाजी और साध्वी ऋजुप्रभाजी ने विचार प्रस्तुत किए। साध्वीवृंद ने सुमधुर गीत का संगान किया। मंगलाचरण शासनश्री साध्वी विमलप्रभाजी ने किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी कौशलप्रभाजी ने किया।