मंगल प्रभात मन भाए

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साध्वी डॉ. कुन्दनरेखा एवं साध्वी सौभाग्ययशा

मंगल प्रभात मन भाए

खुशियों के घन मडंराए, मंगल प्रभात मन भाए,
नव वर्ष की शुभ बेला में, हम शुभ संकल्प सजाएँ।।
1. नया साल हो सबको मुबारक, सारी दुनिया गाएँ,
उछल रहे हैं हर्ष फव्वारे, मिल-जुल मोद मनाएँ।
हर दिन को नया बनाएँ, हर पल को सफल कर पाएँ।।
2. नया जोश हो होश नया हो, नई सोच हो सबकी,
शुभ चिन्तन-मंथन से कर लें, शुद्धि अन्तर्मन की।
सद्गुण सौरभ फैलाएँ, मैत्री के फूल खिलाएँ।।
3. सर्वे भवन्तु सुखिनः जीवन हो सबका सुखमय,
रहें स्वस्थ, आत्मस्थ मस्त हो सर्वे सन्तु निरामय।
प्रेक्षा का ध्यान लगाएँ, ज्योतिर्मय सब बन जाएँ।।
4. शांत-सुखद जीवन यदि जीना व्यसनों से है बचना,
स्मोकिंग, ड्रिंकिंग हुक्का डान्सिग, फैशन में नहीं बहना,
अपनी संस्कृति अपनाएँ, अपने घर को महकाएँ।
वृद्धों का मान बढ़ाएँ, मंगल आशीर्वर पाएँ।।
5. जिन-शासन, भैक्षवगण नन्दनवन हमने है पाया,
महावीर की वाणी, महाश्रमण गुरुवर का साया।
अणुव्रत भवन सरसाए, दिल्ली वासी हर्षाएँ।
तर्ज - ये पर्दा हटा दो