
गुरुवाणी/ केन्द्र
ज्ञानार्जन में हो तर्क पर आज्ञा आराधन में रहें सतर्क : आचार्यश्री महाश्रमण
तेरापंथ के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने महावीर आध्यात्मिक समवसरण में जनता को पावन प्रेरणा देते हुए कहा कि धर्म शब्द दुनियाभर में काफी प्रसिद्ध है। चाहे हिंदी भाषी हो या अन्य भाषी लोग, धर्म का जिक्र हर जगह होता है। अलग-अलग धर्मों के अनुयायी मिल सकते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो किसी भी धर्म को नहीं मानते। आचार्यश्री ने बताया कि नास्तिक भी इस दुनिया में होते हैं। वे स्वर्ग-नरक, पुनर्जन्म, पुण्य-पाप और ईश्वर को नहीं मानते। दार्शनिक दृष्टि से छः प्रमुख दर्शन बताए गए हैं, जिनमें चार्वाक दर्शन नास्तिकवाद की विचारधारा को मान्यता देता है। आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि दर्शन के विभिन्न विचार हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई का महत्व सर्वोपरि है।
विचारधारा में परिवर्तन संभव है—कोई नास्तिक से आस्तिक बन सकता है और आस्तिक से नास्तिक। जो बात सही लगे उसे ग्रहण कर लेना और मान-सम्मान देना आवश्यक है। आचार्यश्री ने अनेकान्तवाद के दृष्टिकोण को अपनाने का सुझाव दिया, ताकि संकीर्णता से बचा जा सके और सही बात का समर्थन किया जा सके। उन्होंने कहा कि सही विचार का अवांछनीय खंडन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे समझकर और स्वीकार कर जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
जहां ज्ञानार्जन की बात हो वहां तर्क किया जा सकता है, लेकिन जहां आज्ञा की बात हो, वहां सतर्क रहने का प्रयास करना चाहिए। आज्ञा में अनावश्यक तर्क करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान संबंधी कोई विषय हो तो तर्क कर सकते हैं, लेकिन जहां अपने गुरु व अपने विशिष्ट की आज्ञा हो तो वहां सतर्कता रखने का प्रयास करना चाहिए। धर्म को सही तरीके से काम में लें तो आत्मा का कल्याण हो सकता है और यदि विषयासक्ति की बात हो जाए तो भला धर्म से कितना लाभ प्राप्त हो सकता है। शास्त्र की वाणियां बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। धर्म के क्षेत्र में भी सही तरीके से कार्य करने का प्रयास हो।
साध्वी ज्योतिश्रीजी की स्मृति सभा का आयोजन आचार्यप्रवर की सन्निधि में साध्वी ज्योतिश्रीजी की स्मृति सभा का आयोजन किया गया। 7 मार्च को गंगाशहर सेवा केंद्र में प्रवासित साध्वी ज्योतिश्रीजी का देवलोकगमन हो गया था। पूज्यवर ने साध्वीश्री का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए मध्यस्थ भावना स्वरुप चार लोगस्स का ध्यान करवाया। साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभाजी एवं मुख्य मुनिश्री महावीरकुमारजी ने साध्वीश्री की आत्मा के आध्यात्मिक उत्थान हेतु मंगलभावना व्यक्त की पूज्यवर के स्वागत में सेंट एलिजाबेथ स्कूल-अंजार के फादर जूडी एवं माउण्ट कार्नियर हाई स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर सहाय विमला ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए आचार्यश्री के प्रवास को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया।