77वें अणुव्रत स्थापना दिवस पर विविध कार्यक्रम

संस्थाएं

हावेरी

77वें अणुव्रत स्थापना दिवस पर विविध कार्यक्रम

साध्वी पुण्ययशाजी के सान्निध्य में हावेरी (कर्नाटक) क्षेत्र में अणुव्रत आंदोलन के 77वें स्थापना दिवस का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत गीत से हुआ, जिसे सभा एवं महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया। साध्वी बोधिप्रभाजी ने अणुव्रत की महत्ता व उपयोगिता को प्रतिपादित करते हुए आत्महत्या एवं भ्रूणहत्या के निषेध पर बल दिया और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दी। साध्वी विनीतयशाजी ने कहा कि आवश्यकताओं का न्यूनकरण, अहंकार का विलय, इच्छाओं पर नियंत्रण, संयम, संतोष, पवित्रता, परस्परता एवं समता – ये अणुव्रत के स्वर्णिम सूत्र हैं। साध्वी पुण्ययशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री तुलसी ने मानव को सच्चा मानव बनाने के लिए यह आंदोलन प्रारंभ किया। अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से संयममय जीवन जीने पर बल दिया गया, जिससे लाखों लोगों को व्यसन मुक्त किया गया। अणुव्रत की आत्मा संयम है, और संयम से ही जीवन मूल्यवान बनता है। इच्छाओं के संयम से जीवन में प्रामाणिकता एवं पवित्र आचरण का विकास होता है, और अणुव्रत आत्मविश्वास प्रदान करता है। साध्वीश्री ने उपस्थित जनसमूह को अणुव्रत आचार संहिता के नियम बताए और प्रत्याख्यान भी कराया। कार्यक्रम में बालचंद जीरावला, कुंदनमल संचेती, चिरंजीलाल संचेती, राकेश जीरावला, हितैष संचेती और दीपक संचेती ने गीतिका का संगान किया। मंच का कुशल संचालन साध्वी वर्धमानयशाजी ने किया।