जीता जग झंझाल

रचनाएं

मुनि कमलकुमार

जीता जग झंझाल

तुलसी गुरू कर कमल से, संयम व्रत स्वीकार।
महाश्रमण युग में किया, अपना आत्मोद्वार।।
ज्योतिश्री जी ने किया, सचमुच काम कमाल।
संयम जीवन सफल कर, जीता जग झंझाल।।
विशदप्रभा लब्धियशादिक, सतियां गाती गीत।
फाल्गुन शुक्ला सप्तमी, बन गई तिथि पुनीत।।
डूंगरगढ़ जन्मस्थली, गंगाशहर प्रयाण।
कमल श्रेयांसादिक श्रमण, करते हैं गुणगान।।