जहाँ का सितारा तू मां

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साध्वी भावितयशा

जहाँ का सितारा तू मां

जहाँ का सितारा तू मां
होली पवित्र बनी तुझको पाकर
ममता की मूरत मां... ओऽऽऽ जहां का…
सम, शम, श्रम ही पूजा तुम्हारी
शासन माता तू माँ, ओऽऽऽ जहां का…
गण- गणपति की दृष्टि मिली तो,
उन्नति करते रहे।
अपनी सहोदरी से, नाता तोड़ा,
सर्व समर्पित रहे।
कला से कनकप्रभा, साध्वी प्रमुखा।
गणवन शान, महान है माँ।।
भक्ति रस से भीगा, काव्य रस तुम्हारा,
जन-जन मन मोहे।
सृजन शक्ति कौशल कला का विलक्षण,
साहित्य जग शोभे।
उपशम, रसमय, मातृहृदया,
संपादन तेरे, गण संपदा।।
निरहंकारिता, निस्पृहता से,
गण दिल वास करे।
आधी दुनिया, गण के तुम थे,
श्रमणीगण शिरमोर बने।
सौभागी हम, तुझको पाया,
तुलसी कृति, भव्यकथा।।
लय - दिल है कि मानता नहीं