साधना की गहराई में जाने वाला ही पा सकता है अपना लक्ष्य

संस्थाएं

सिरियारी।

साधना की गहराई में जाने वाला ही पा सकता है अपना लक्ष्य

आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल परिसर के भिक्षु आराध्यम् में प्रेक्षा कल्याण वर्ष के अन्तर्गत षष्ठम प्रेक्षाध्यान शिविर की आयोजना का समापन समारोह हुआ। इस शिविर में लगभग 32 साधक-साधिकाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मुनि धर्मेशकुमारजी ने अपने उद्बोधन में कहा-शिविर साधना का मुख्य ध्येय है-आत्मोपलब्धि। साधना की गहराई में जाने वाला ही अपने लक्ष्य को पा सकता है। मुनि चैतन्य कुमार जी 'अमन' ने कहा- प्रत्येक आत्मा अनंत शक्ति सम्पन्न है। जब ध्याता, ध्येय और ध्यान एक रूप हो जाते हैं तभी आत्म साक्षात्कार हो सकता है। ध्यान के प्रयोग से बिखरी शक्ति को एक स्थान पर एकत्रित कर उसका सदुपयोग किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रेक्षा साधिकाओं ने प्रेक्षागीत का संगान किया। उतमचंद सुखलेचा ने अपने विचार प्रकट करते हुए सभी का स्वागत किया। डालमचंद बांठिया, हेमराज सुंदेचा, हनुमान बरड़िया, ऋषभ बरड़िया, सीमा कावड़िया, हिम्मत बांठिया ने अपने विचार व्यक्त किए। अन्त में शिविरार्थियों को साहित्य एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन रणजीता बागरेचा ने किया। आभार अभिषेक दूगड़ ने प्रकट किया।