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शासनमाता का महाप्रयाण दिवस समायोजित
शासनमाता असाधारण साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी की तृतीय पुण्यतिथि का आयोजन स्मरणांजंलि के रूप में तेरापंथ भवन परिसर महरौली में 'शासनश्री' साध्वी सुव्रतांजी के सान्निध्य में हुआ। साध्वी वृन्द के सान्निध्य में वात्सल्य पीठ में गुरुदेव द्वारा प्रदत्त मंत्र 'ऊं ह्लीं श्रीं क्लीं शासनमात्रे नमः' का श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सामूहिक जाप ने पूरे परिसर को अध्यात्म से तंरगित कर दिया। कार्यक्रम का अगला चरण महाप्रज्ञ सभागार में भावांजलि के रूप में आयोजित हुआ। साउथ दिल्ली महिला मंडल की बहनों ने सुमधुर मंगलाचरण किया। साध्वीप्रमुखाजी के ज्ञातीजन रश्मि नौलखा, नरपत दुगड़, निर्मला दुगलिया और पुखराज सेठिया ने की भावाभिव्यक्ति हुई। दक्षिण दिल्ली सभा के अध्यक्ष सुशील पटावरी, जैविभा उपाध्यक्ष पन्नालाल बैद, महिला मंडल अध्यक्ष शिल्पा बैद, अणुव्रत न्यास के प्रबन्ध न्यासी के.सी. जैन, अखिल भारतीय महिला मंडल की पूर्वाध्यक्ष सायर बैगांनी, विख्यात चिकित्सक डा. राजेश कुण्डलिया तथा दिल्ली सभा के अध्यक्ष सुखराज सेठिया आदि ने संस्मरणों कविताओं और संदेशों के माध्यम से श्रद्धार्पण किया। 'शासनश्री' साध्वी सुव्रताजी ने शासनमाता के प्रति आस्था अभिव्यक्त करते हुए उन्हें अनेक गुणों का समवाय बताया। उन्होंने कहा कि वे वीतराग पथ की अतुत्तर साधिका और ज्ञान दर्शन चरित्र की उत्कृष्ट आराधिका थी। 'शासनश्री' साध्वीश्री सुमनप्रभा जी ने कहा उनका बाह्य व्यक्तित्व जितना आकर्षक उनका आन्तरिक व्यक्तित्व भी उतना ही प्रभावी था। अध्यात्म निष्ठा, चारित्रिक निर्मलता, श्रमशीलता, चिन्तन शीलता, सहिष्णुता और मृदुता जैसे गुणों से परिपूर्ण था उनका व्यक्तित्व।
साध्वीश्री कार्तिकप्रभाजी और साध्वी चिन्तनप्रभाजी ने शासनमाता के गुणों का स्मरण करते हुए वक्तव्य और गीत प्रस्तुत किया। दिल्ली सभा के मधुर संगायकों ने गीत के माध्यम से वातावरण को सुरमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री प्रमोद घोड़ावत ने तथा आभार ज्ञापन तेरापंथ भवन के व्यवस्थापक संदीप डूंगरवाल ने किया। पूरी दिल्ली के सभी क्षेत्रों से अच्छी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने उपस्थित होकर शासन माता के प्रति श्रद्धार्पण किया।