
रचनाएं
गुण गौरव गांवां सा
साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी रो गुण गौरव गांवा सा,
असाधारण प्रमुखा रो गुण गौरव गांवा सा।
शासन माता ने मिलकर में तो आज बुलावा सा।।
तेरापंथ द्विशताब्दी अवसर आयो,
तुलसी हाथां स्यूं संयम पायो,
मेवाड केलवा रो भाग्य सवायो,
प्रमुखा जी रो दीक्षा स्थान कहायो,
तुलसी कृति ने मिलकर शीश झुकावां सा।।
सहज सौम्य मुद्रा सबको लुभाती,
मंद-मंद चाल थारी सब मन भाती,
प्रवचन शैली थारी अलबेली,
करुणा वत्सलता सब पर उंडेली,
म्हारा मन मंदिर में आस्था रा दीप जलावां सा।।
तेरापंथ संघ है थारो आभारी,
गण में काम करयो थे उपकार भारी,
विनय, समर्पण, सेवा संस्कार भरता,
हर एक समस्या रो समाधान करता,
दिल्ली महरौली में पुण्य तिथि म्हें आज मनावां सा।।