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गुरु के प्रताप से है हमारा अस्तित्व
अणुव्रत भवन में अपने मंगल भावना समारोह में श्रावक समाज को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी को विदूषी शिष्या साध्वी कुन्दन रेखा जी ने कहा आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञजी व युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने संयम जीवन की जिस ऊंचाई को प्राप्त किया है उसके पीछे उनकी लम्बी साधना रही है। अपने सिद्धान्तों और आदर्शों के प्रति गहरी आस्था, गुरु के प्रति अटूट समर्पण और अपने आत्म संयम की साधना से ही उन्होंने जीवन के उच्च शिखरों का आरोहण किया है।
गुरुदेव समाज को केवल उपासना प्रधान नहीं देखना चाहते, वे उसके व्यवहार में नैतिकता और भावों में अध्यात्म की भूमिका भी देखना चाहते हैं। जीवन में रूपान्तरण लाने के उपाय और प्रक्रिया भी उन्होंने बताई है, जिससे हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो सकते हैं। गुरूजनों के आशीर्वाद से हमारा अणुव्रत भवन का चातुर्मास बहुत ही साताकारी रहा। इस चातुर्मास में अनेकों कार्यक्रम हुए, शीर्षस्थ लोगों का आवागमन रहा। अनेकों संघीय कार्यक्रम हुए। साध्वीश्री ने सेवा का उल्लेख करते हुए प्रेरणा दी की हमारे धर्मसंघ की सेवा विरल है। उन्होंने कहा कि अणुव्रत भवन धर्मसंघ का महत्वपूर्ण भवन है जहां से तेरापंथ संघ की अनेकों गतिविधियां संपादित होती हैं। यहां से संपादित उपक्रम संघहित व राष्ट्रहित के लिए होते हैं।
अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबन्ध न्यासी के.सी. जैन ने कहा कि संत समस्याओं की नब्ज को पहचान कर उनका समाधान प्रस्तुत करने वाले होते हैं वे लोगों को ठोस कार्य करने के लिए केवल प्रेरित ही नहीं करते, उसकी क्रियान्विति भी करवाना जानते हैं। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा दिल्ली के अध्यक्ष सुखराज सेठिया ने कहा कि संत समाज को बदलने का सूत्र देते हैं उसके उपाय भी सुझाते हैं। साध्वी कुन्दनरेखा जी का चातुर्मास अणुव्रत भवन व अध्यात्म साधना केन्द्र में होना हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मण्डल, अणुव्रत समिति ट्रस्ट, संघीय संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भी साध्वी श्री के गुणों व उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर साध्वी सौभाग्यशाजी ने भावपूर्ण गीतिका के माध्यम से और साध्वी कल्याणयशा जी ने साध्वी अणुव्रत भवन में हुए साताकरी चातुर्मास के लिए समाज का आभार व्यक्त किया। तेरापंथ सभा, दिल्ली के महामंत्री प्रमोद घोड़ावत, तेरापंथ महिला मंडल की पूर्व अध्यक्षा मंजु जैन, दक्षिण दिल्ली के अध्यक्ष सुशील पटावरी, सुप्रसिद्व वास्तु विशेषज्ञ उम्मेद दूगड, अणुव्रत न्यास के रमेश काण्डपाल आदि अनेक वक्ताओं ने अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त की। मध्य दिल्ली महिला मंडल की बहनों ने भावपूर्ण गीतिका का संगान किया।