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शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी की पुण्यतिथि पर विविध कार्यक्रम
शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा जी की पुण्य तिथि के अवसर पर साध्वी सिद्धप्रभाजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन मंड्या में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शुभारम्भ महिला मण्डल के गीत से हुआ। इस अवसर पर साध्वी सिद्धप्रभाजी ने कहा - शासनमाता अनुत्तर विशेषताओं की पुंज थी। करुणा और वात्सल्य की धनी थी। जिस मां में करुणा नहीं होती उसके लिए एक-दो बच्चों का पालन भी मुश्किल हो जाता है। वहीं शासन माता लगभग 500-550 साध्वियों का संरक्षण करती थी। साध्वीप्रमुखाश्री ने अपने जीवन में सैकड़ों अनगढ़ पत्थरों को अपनी ममता से तराशा है, विकास के नए-नए द्वार उद्घाटित किए हैं। ऐसी शासनमाता चिरकाल तक अमर रहेंगी। साध्वी श्री ने आगे कहा- आचार्य श्री तुलसी ने उन्हें कला से साध्वी कनकप्रभा, संघ महानिर्देशिका, साध्वी प्रमुखा आदि पदों से नवाजा।
आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने उन्हें भगवती संबोधन प्रदान किया। आचार्य श्री महाश्रमणजी ने असाधारण और शासनमाता अलंकरण से विभूषित किया। साध्वीश्री ने कहा घर में माँ का जितना प्यार नहीं मिलता उससे कई गुणा अधिक हमें शासनमाता का प्यार मिला। हमारा सौभाग्य है कि हमें उनके अन्तिम समय में उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर तीनों साध्वियों ने संस्मरणों की रोचक प्रस्तुति दी तथा मधुर गीत का संगान किया। कन्या मण्डल ने 'ये जहां तुम्हे पुकारे' परिसंवाद प्रस्तुत किया। सभा मंत्री विनोद भंसाली एवं चन्दनमल बोहरा ने भावांजलि अर्पित की। अंत में सामूहिक जप के साथ कार्यक्रम परिसम्पन्न हुआ। संचालन साध्वी दीक्षाप्रभाजी ने किया।