केवल नाम से नहीं, आचरण से बनें जैन

संस्थाएं

विरार।

केवल नाम से नहीं, आचरण से बनें जैन

प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने श्रावक सम्मेलन में उपस्थित विरार श्रावक समाज को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकाश, आनंद और शक्ति की यात्रा जहां से प्रारंभ होती है, वह सम्यक दर्शन कहलाता है। व्रत की चेतना से भावित यात्रा श्रावकत्व होती है। श्रावकत्व की घनीभूत चेतना साधुत्व है और वही यात्रा आगे बढ़ती हुई सिद्धत्व व बुद्धत्व की धारक बनती है। अनुयायी जन्मजात होते हैं, परंतु श्रावक बनने के लिए व्रत-चेतना का जागरण आवश्यक है। हम सौभाग्यशाली हैं जिन्हें प्रभु महावीर का वीतराग शासन मिला और साधना के लिए तेरापंथ नाम से विख्यात भिक्षु शासन प्राप्त हुआ।
साध्वीश्री ने कहा कि संघ की नींव को गहरा करने में साधु-साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं का महनीय बलिदान है। विनय, समर्पण, और बुजुर्गों के प्रति सम्मान जैसे विशेष गुण हमें संस्कार रूप में प्राप्त हुए हैं। आज यह विचारणीय विषय है कि इन गुणों का कितना संवर्धन हो रहा है और कितना ह्रास। उन्होंने कहा कि जिस संघ के सदस्य विद्याशील, संगठित, विनयवान और समर्पित होते हैं, उसका ग्राफ सदैव ऊंचा होता है। एक गुरु की आज्ञा और गुरु निष्ठा का अद्भुत रूप तेरापंथ संघ में दिखाई देता है। चतुर्दशी के अवसर पर हाजरी वाचन करते हुए साध्वीश्री ने प्रेरणा दी और कहा कि संघ की मौलिक मर्यादाएं हमारी पथ-प्रदर्शक हैं। हमने संघ की शरण को स्वीकार किया है और हमारा विश्वास आत्मदर्शन में है, न कि प्रदर्शन में। हर व्यक्ति को अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए।
समाज में जो कुरीतियां जन्म ले रही हैं, उनका अंत हो। समाज को स्वस्थ बनाने के लिए मौन धारण करने के बजाय कुरीतियों पर प्रहार करें। जो समाज अनुशासन और मर्यादा में चलता है वही जागरूक समाज कहलाता है। अपने इरादों को मजबूत बनाएँ, उन्हें साकार करें और अपने हौसलों को ऊंचा रखें। साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने वर्तमान सामाजिक प्रवृत्तियों की आलोचना करते हुए कहा कि आज प्री-वेडिंग पार्टी, पूल पार्टी, हुक्का पार्टी और शादी जैसे प्रसंगों पर जैन समाज में शराब की बोतलें खुलना शोभास्पद नहीं है। परिवारों को और भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखना अभिभावकों का परम दायित्व है। केवल नाम से नहीं, बल्कि आचरण से जैन बनना आवश्यक है।
विरार की धरती पर प्रथम बार आयोजित श्रावक सम्मेलन के अवसर पर साध्वीश्री जी ने कहा कि वसई-नालासोपारा-विरार स्तरीय यह श्रावक सम्मेलन वरदान बने, ऐसा पवित्र संकल्प जरूरी है। गुरु निर्देशानुसार इन क्षेत्रों की हमारी यात्रा में श्रद्धा का पारावार उमड़ रहा है। श्रद्धा, भक्ति, समर्पण और गुरु इंगित आराधना की भावना निरंतर प्रवर्धमान रहे।
गण विकास में समय और शक्ति का सम्यक नियोजन होता रहे और कहीं हमारी किसी भूल से युवा पीढ़ी मार्ग से विचलित न हो—ऐसा संकल्प और प्रयास अवश्य हो।
साध्वी शौर्यप्रभा जी ने कहा कि संघ के सच्चे सैनिक बनकर उसकी सुरक्षा के लिए सतत चिंतन करना हर श्रावक का दायित्व है। साध्वी वृंद ने 'तेरापंथ अक्षरधाम म्यूजियम' की भव्य प्रस्तुति दी। वहीं ज्ञानशाला के किशोरों और कन्याओं द्वारा प्रस्तुत 'तेरापंथ मिलिट्री फोर्स' कार्यक्रम ने सभी में नया जोश भर दिया। विरार महिला मंडल द्वारा मंगल संगान के पश्चात, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष किरण हिंगड़ और तेरापंथ सभा विरार के अध्यक्ष अजयराज फुलफगर ने विशेष अतिथियों, पदाधिकारियों और संपूर्ण परिषद का हार्दिक स्वागत किया।
साध्वी वृंद और भिक्षु भजन मंडली विरार द्वारा भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया गया। विरार सभा के मंत्री लक्ष्मीलाल डांगी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी डॉ. राजुलप्रभा जी ने किया। पूरे समाज की सराहनीय उपस्थिति रही।