जे सूर करें पचखांण, ते एक धारा रहे। त्यां जीतब जनम सुधारियो।। शूरवीर आदमी जो संकल्प करता है उसे एकधार निभाता है। उसका जीवन धन्य हो जाता है। - आचार्य श्री भिक्षु
जे सूर करें पचखांण, ते एक धारा रहे। त्यां जीतब जनम सुधारियो।। शूरवीर आदमी जो संकल्प करता है उसे एकधार निभाता है। उसका जीवन धन्य हो जाता है।