गुरुवाणी/ केन्द्र
आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में संपन्न हुआ अभातेयुप का 59वां राष्ट्रीय अधिवेशन
युवा मनीषी युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् (अभातेयुप) का 59वां राष्ट्रीय अधिवेशन 'एकत्व' त्रिदिवसीय भव्यता के साथ संपन्न हुआ। अधिवेशन का शुभारंभ राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश डागा एवं महामंत्री अमित नाहटा के संबोधन से हुआ, जिसमें परिषद की गतिविधियों और उपलब्धियों का सार प्रस्तुत किया गया। परिषद सदस्यों ने अधिवेशन गीत का संगान किया।
आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने पावन पाथेय में कहा कि अभातेयुप तेरापंथ समाज की एक सशक्त युवा शक्ति है, जो सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। आचार्य प्रवर ने प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि आने वाले योगक्षेम वर्ष में परिषद अपने इतिहास और कार्यों पर आधारित प्रेरक सामग्री तैयार करे तथा चिंतन शिविरों के माध्यम से नए उन्मेष की दिशा में कदम बढ़ाए।
अधिवेशन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सत्र आयोजित किये गए। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना आचार्य भिक्षु की अद्भुत संगठन क्षमता और दूरदर्शी चिंतन का परिणाम थी। “एक गुरु, एक विधान, एक अनुशासन” की उनकी परंपरा ने संघ को एकता और व्यवस्था का आदर्श स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व केवल पद नहीं, बल्कि दृष्टि और जिम्मेदारी है। परंपरा तभी सार्थक है जब उसके
पीछे उद्देश्य जीवित हो; अन्यथा वह केवल औपचारिकता बन जाती है।
रात्रिकालीन सत्र में प्रसिद्द बिजनेस कोच उज्जवल पाटनी ने युवकों को व्यापार एवं जीवन में सफलता के सूत्र समझाए।
द्वितीय दिवस प्रवचन के पश्चात कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि आचार्यश्री के दर्शन और आशीर्वाद का यह क्षण उनके जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री द्वारा दिया गया सद्भावना, नैतिकता और नशा-मुक्त जीवन का संदेश संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी की दृष्टि, आचार्य महाप्रज्ञजी का विज्ञान और आचार्यश्री महाश्रमणजी का संयम – यही तेरापंथ युवक परिषद की आत्मा है।
साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने युवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा Intuition पावर को बढ़ाएं, Innovation करें और Industrious (परिश्रमी) बनें। उन्होंने कहा कि अपनी मनी को मीनिंगफुल और प्रॉपर्टी तो परपोसेफुल बनाएं। आपने अनुशासन एवं व्यवस्था पक्ष को सुदृढ़ करने का भी आह्वान किया। बहुश्रुत परिषद् सदस्य मुनि दिनेशकुमारजी ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे बुद्धि का उपयोग आत्मोन्नति में, वाणी का प्रयोग सत्य और प्रेरणा में, तथा धन और शरीर का उपयोग सेवा और संयम में करें — यही भिक्षु दर्शन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि “युवक वह कर सकता है जो और कोई नहीं कर सकता,” इसलिए हर युवक को अपनी निष्ठा, ऊर्जा और प्रतिभा को धर्मसंघ की सेवा में समर्पित करना चाहिए।
आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमारजी ने कहा कि यदि आचार्य भिक्षु न होते, तो धर्म और अनुशासन का मार्ग अधूरा रहता। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संयम और सेवा की ज्योति प्रज्वलित रखी। उन्होंने कहा कि तेरापंथ युवक परिषद के कार्यकर्ता आज गुरु की दृष्टि और आदेश के अनुसार सेवा में तत्पर हैं, और यही संगठन की सबसे बड़ी शक्ति है।
मुनि कुमारश्रमणजी ने कहा कि परंपराओं और रीतियों का अंधानुकरण व्यक्ति और संगठन, दोनों के विकास में बाधक बनता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे दिखावे या औपचारिकता से ऊपर उठकर सार्थकता, सादगी और प्रमोद भावना को अपनाएँ। सच्चा नेतृत्व वही है जो समयानुकूल निर्णय लेने का साहस रखे।
दोनों दिवसों में अभातेयुप द्वारा अनेकों परिषदों को विभिन्न श्रेणियों में विभिन्न आयामों के लिए पुरस्कृत किया गया। अधिवेशन के अंतिम दिवस आचार्यश्री की पावन सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् की नवनिर्वाचित टीम का शपथ ग्रहण समारोह भी संपन्न हुआ। निवर्तमान अध्यक्ष रमेश डागा ने अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति देकर नवनिर्वाचित अध्यक्ष पवन मांडोत को शपथ दिलाई। नव मनोनीत अध्यक्ष पवन मांडोत ने आचार्य प्रवर के समक्ष अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करते हुए, अपनी टीम की घोषणा की एवं उन्हें शपथ ग्रहण करवाई। नव मनोनीत पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष प्रथम अनंत बागरेचा, उपाध्यक्ष द्वितीय अभिनन्दन नाहटा, महामंत्री सौरभ पटावरी, सह मंत्री प्रथम पवन नौलखा, सह मंत्री द्वितीय अंकुर लूणिया, कोषाध्यक्ष विकास बोथरा एवं संगठन मंत्री के रूप में रोहित कोठारी ने शपथ ग्रहण की।
सर्वश्रेष्ठ परिषद - तेयुप विजयनगर
सेवा - श्रेष्ठ परिषद तेयुप अहमदाबाद व तेयुप सूरत (संयुक्त)
संस्कार - श्रेष्ठ परिषद तेयुप जयपुर एवं तेयुप हैदराबाद (संयुक्त)
संगठन - श्रेष्ठ परिषद तेयुप पूर्वांचल कोलकाता व तेयुप उधना (संयुक्त) रही।