दंपति शिविर का हुआ आयोजन

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जसोल।

दंपति शिविर का हुआ आयोजन

आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी रतिप्रभा जी के सान्निध्य में ‘कैसे बने खुशहाल दाम्पत्य जीवन’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन पुराना ओसवाल भवन के सभागार में हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ सतीश भंसाली एवं धनपत संकलेचा द्वारा ‘समता धारो तो’ इस सुमधुर भजन के साथ हुआ। साध्वी रतिप्रभा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह संसार संबंधों की दुनिया है। जो बांधने से बंधे और तोड़ने से टूट जाए, उसका नाम है बंधन; पर जो अपने आप बने और जीवनभर न टूटे, वही संबंध कहलाता है। दाम्पत्य जीवन आत्मीयता से गहरा और सुनहरा बनता है। रिश्ते बनाना आसान है, पर निभाना कठिन। इसलिए बनाने से पहले उसे निभाना सीखें। उन्होंने कहा कि दांपत्य जीवन के सफल सूत्र हैं – साथी के गुणों को उजागर करें, लेट गो की वृत्ति अपनाएं, कहना सीखें, सहना सीखें और साथ रहना सीखें।
साध्वी कलाप्रभा जी ने अपने प्रवचन में कहा, “विवाह के बाद घर स्वर्ग कैसे बने?” इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “यदि मैं कभी क्रोध बन जाऊं तो तुम पानी बन जाना, और जब तुम क्रोध बन जाओ तो मैं पानी बन जाऊँगा।” इस आपसी समझ और संतुलन से जीवन-रूपी गाड़ी सुचारू रूप से चलती है। रुचि और विचार भिन्न होने पर भी एक-दूसरे को समझकर आगे बढ़ें। साध्वी मनोज्ञयशा जी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए कहा कि रिश्तों के चार प्रकार होते हैं – खून का रिश्ता, आत्मीय रिश्ता, सामाजिक रिश्ता और औपचारिक रिश्ता। दांपत्य जीवन में सामाजिक रिश्ते के साथ आत्मीयता का रिश्ता भी जुड़ा होता है। यह रिश्ता प्रेम, मैत्री, श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को सुख पहुँचाता है। साध्वी पावनयशा जी ने कहा कि एक-दूसरे में अंडरस्टैंडिंग होना, प्रोत्साहन देना और सहयोग बनाए रखना जीवन रूपी बगिया को महकाता है। उन्होंने “साथ-साथ कैसे रहें” विषय पर एक सुंदर कविता भी प्रस्तुत की।
तेरापंथ कन्या मंडल एवं महिला मंडल ने एक लघुनाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया कि जीवन में एक-दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्वक कैसे जिया जाए। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान तेरापंथ सभा मंत्री धनपत संकलेचा, महिला मंडल अध्यक्ष ममता मेहता और माणकचंद संकलेचा ने परिवार में पति-पत्नी के बीच उत्पन्न समस्याओं को संतुलित रखने के विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में सभी भाई-बहनों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे विनम्रता, सहिष्णुता और सामंजस्य का विकास करेंगे तथा समस्याओं का समाधान आपसी संवाद से करेंगे। साथ ही संघ के विकास के लिए समय और श्रम का समर्पण करेंगे। इस कार्यशाला में लगभग 110 भाई-बहनों ने भाग लिया। आभार ज्ञापन अभातेयुप सदस्य तरुण भंसाली द्वारा किया गया।