आचार्य तुलसी की 112वीं जन्म जयंती का आयोजन

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विजयनगर, बैंगलुरु।

आचार्य तुलसी की 112वीं जन्म जयंती का आयोजन

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, विजयनगर के तत्वावधान में साध्वी संयमलता जी के सान्निध्य में आचार्य श्री तुलसी की 112वीं जन्म जयंती का आयोजन तेरापंथ सभा भवन में भव्य रूप से संपन्न हुआ।साध्वी संयमलता जी ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी तेज और ओज के अद्भुत समन्वय थे — वे भक्ति और शक्ति के स्रोत, तथा शांति और क्रांति के संगम थे। वे एक कुशल दार्शनिक, व्यवहारकुशल और आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे। 20वीं शताब्दी के महानायक एवं धर्मगुरु के रूप में उन्होंने समाज सुधार की दिशा में अद्वितीय योगदान दिया। तेरापंथ की धरती पर वे भोर की किरण बनकर अवतरित हुए, धूप की भाँति खिले और प्रखर सूर्य बनकर अंधकार को उजालों में बदल दिया। उन्होंने मानव को सच्चा मानव बनना सिखाया तथा संपूर्ण मानवता को सही दिशा प्रदान की।
साध्वी मनीषाप्रभा जी ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी “विकास पुरुष” थे, जिन्होंने नई लकीरें खींचकर संघ को उन्नति के शिखर पर पहुँचा दिया। ऐसे महामानव को शत-शत नमन। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री के मुखारविंद से “नमस्कार महामंत्र” के उच्चारण से हुआ, तत्पश्चात सुशील पारख ने मंगलाचरण का मधुर संगान किया। सभा अध्यक्ष मंगल कोचर, तेयुप अध्यक्ष विकास बांठिया, और महिला मंडल अध्यक्ष महिमा पटवारी ने गुरुदेव के प्रति अपने भाव व्यक्त किए।
सुवालाल चावत ने “लाडनूं रो हीरो” गीत का भावपूर्ण संगान किया।