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कैसे थामें रिश्तो की डोर पारिवारिक उत्कर्ष कार्यशाला
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, विजयनगर के तत्वावधान में साध्वी संयमलता जी के सान्निध्य में ‘कैसे थामें रिश्तों की डोर’ पारिवारिक उत्कर्ष कार्यशाला का आयोजन स्थानीय तेरापंथ भवन में किया गया। साध्वी संयमलता जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा जब प्रेम के परिसर में सहयोग की ईटें, मर्यादा की मिट्टी, चारित्र की सीमेंट और चूना, आत्मीयता की आईसीसी एवं दुआओं के दरवाजे होते हैं तब वह परिवार कहलाता है। रिश्तों की डोर को थामने एवं परिवार में सामंजस्य के लिए हम 4 बी पर ध्यान दें, भजन, भोजन, भाषण एवं भ्रमण परिवार के साथ करें। जिससे परिवार में गलतफहमी और गलत बातों का संचार जैसी परेशानियां पैदा न हो। साध्वी मार्दवश्री जी ने ध्यान का प्रयोग करते हुए कहा रिश्तों को अच्छा बनाने के लिए संस्कार निर्माण करना आवश्यक है। साध्वी रौनकप्रभा जी ने भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम में सभा अध्यक्ष मंगल कोचर, उपाध्यक्ष भंवर लाल जी मांडोत सहित श्रावक श्राविका समाज की उपस्थिति रही।