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चुनौतियों से घबराएं नहीं बल्कि उन्हें ललकारे
तेरापंथ कन्या मंडल द्वारा साध्वी पुण्ययशा जी के सान्निध्य में “Calm Within the Chaos” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ साध्वीश्री के नमस्कार महामंत्र से हुआ। कन्या मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया तथा आगंतुकों का स्वागत मंत्री वंदना भंसाली ने किया। विषय की प्रस्तुति छवि नौलखा ने दी। कन्याओं द्वारा एक प्रेरक पॉडकास्ट प्रस्तुत किया गया, जिसमें लक्ष्मी अग्रवाल, हरमनप्रीत कौर और कल्पना चावला जैसी प्रसिद्ध हस्तियों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए धैर्य, साहस और शक्ति का संदेश दिया गया।
साध्वी पुण्ययशा जी ने “Calm Within the Chaos” अर्थात *अस्थिरता में स्थिरता* विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन की राह कभी सीधी रेखा नहीं होती — यह उतार-चढ़ाव, सफलताओं-विफलताओं, हर्ष-विषाद और संघर्षों से भरी होती है। हर मोड़ पर कोई न कोई चुनौती सामने आती है — कभी पढ़ाई की, कभी करियर की, कभी रिश्तों की, तो कभी आत्मविश्वास की। सच्चा जीवन वही है जो चुनौतियों से घबराए नहीं, बल्कि उनका सामना साहसपूर्वक करे। बहुत से लोग अपनी क्षमताओं को इसलिए नहीं पहचान पाते क्योंकि वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से डर जाते हैं।
साध्वीश्री ने कहा कि जहाँ एक ओर तकनीकी विकास और डिजिटल संसाधनों ने शिक्षा के नए द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिस्पर्धा, मानसिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ भी उतनी ही तेजी से बढ़ी हैं। जीवन में सफलता पाने के पाँच मूल सूत्र हैं — सकारात्मक सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास, कार्ययोजना और परिश्रम।
साध्वी वर्धमानयशा जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जीवन में शांति क्यों आवश्यक है — क्योंकि यह निर्णय क्षमता, रिश्तों की मधुरता, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, तथा आत्म-विकास के लिए आधार बनती है। उन्होंने कहा कि कार्य को बढ़ाने के लिए मल्टीटास्किंग से बचें, एकाग्रता बढ़ाएँ, मिडब्रेन एक्टिवेशन करें और डिजिटल डिटॉक्स अपनाएँ। साध्वी बोधिप्रभा जी ने “जीवन में सफलता के दस रहस्य” विषय पर अपने भाव प्रस्तुत किए।
कार्यशाला का सुंदर संचालन कन्या मंडल प्रभारी बनिता दूगड़ ने किया तथा आभार ज्ञापन हंसिका बैद ने व्यक्त किया। आयोजन में अध्यक्ष मंजू बोथरा का पूर्ण सहयोग रहा। संयोजिका झलक रूनवाल और सह-संयोजिका प्रज्ञा मरोठी ने अपने श्रम और समर्पण से कार्यक्रम को सफल बनाया।