भीतर के अंधकार को मिटाकर आत्मा को उज्जवल बनाने का पर्व है- दीपावली

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विजयनगर, बैंगलोर।

भीतर के अंधकार को मिटाकर आत्मा को उज्जवल बनाने का पर्व है- दीपावली

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, विजयनगर के तत्वावधान में साध्वी संयमलता जी ठाणा- 4 के सान्निध्य में दीपावली के रंग - त्याग के संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वी संयमलता जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा समृद्धि, सुख और संतोष का संगम है धनतेरस। धन अर्थात स्वास्थ्य की कामना का दिन। आज के दिन समुद्र मंथन से धनवंतरी देवता अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, जिन्होंने मानवता को स्वस्थ जीवन का वरदान दिया। यह दिन शरीर मन एवं आत्मा की समृद्धि का द्योतक है। दीप जलाने का उद्देश्य केवल बाहर के अंधकार को मिटाना नहीं बल्कि भीतर पड़े लालच, ईर्ष्या व मोह के तिमिर को मिटाकर आत्मा को उज्जवल एवं प्रकाशमान बनाना है। साध्वीश्री द्वारा आज से अनवरत तीन दिन चलने वाले पैसठिया छंद अनुष्ठान का शुभारंभ किया। साध्वी मनीषाप्रभा जी ने भीतर के अंधकार को मिटा कर दिवाली मनाने का संदेश दिया। साध्वी मार्दवश्री जी ने विशेष त्याग प्रत्याख्यान करने की प्रेरणा दी। किशोर मंडल व कन्या मंडल द्वारा रोचक प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम में श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही।