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'आवाज बुलंदी की' कार्यशाला हुआ आयोजन
मुनि हिमांशु कुमार जी के सानिध्य में आयोजित ‘आवाज बुलंदी की’ कार्यशाला में मुनि हेमंत कुमार जी ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जब हमारी आवाज में तीन महत्वपूर्ण तत्व होते हैं - क्लियरिटी, कॉन्फिडेंस और कंट्रोल - तब हमारा संदेश लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है और उसका महत्व बढ़ जाता है। मुनि हेमंत कुमार जी ने कहा कि अगर हमें वास्तविक परिवर्तन लाना है, तो अपनी बात को प्रश्नों के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। जब हम अपनी बात को प्रश्नों में रखते हैं, तो इसका गहरा प्रभाव पड़ता है और परिवर्तन जरूर आता है। मुनि हिमांशु कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अगर सैनिक सो जाता है, तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, और अगर संत सो जाते हैं, तो संस्कृति और आध्यात्मिकता की रक्षा नहीं हो पाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि अगर हमें किसी के हृदय में परिवर्तन लाना है, तो हमें चाबी की तरह बनना होगा, जो उनके दिल को खोल सके। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक पेड़ को एक बच्चा या एक व्यक्ति नहीं हिला सकता, लेकिन अगर सभी लोग मिलकर एकजुट होकर प्रयास करें, तो उसे हिलाना संभव हो सकता है। इसी तरह, अगर हम सभी सत्यता और विनय के साथ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे, तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।