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घट-घट सम्यक्त्व का दीप जले
जयपुर। सोडाला, श्यामनगर स्थित भिक्षु साधना केंद्र में दीपावली पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि तत्त्वरुचि जी “तरुण” ने कहा - सम्यक्त्व आत्मोन्नति का आधार है। उन्होंने कहा कि - दीप बाहर का अंधकार मिटा सकता है। भीतरी अंधकार को मिटाने के लिए सम्यक्त्व का दीप जलाना होता है। घट-घट विवेक और सम्यक्त्व का दीप जले और चहुंदिशी अहिंसा, मैत्री, करुणा, संयम, समता, सहिष्णुता, विनय, क्षमा का प्रकाश फैले। मुनिश्री ने भगवान महावीर के संदेश का वाचन करते हुए कहा - चेतना का दीप जलने पर सभी समस्याओं का हल संभव है। मुनि संभव कुमार जी ने कहा - राग-द्वेष का अंधकार घट-घट समाया हुआ है। उसका समाधान समता का दीप जलने से होगा। समता धर्म शांति का सर्वोच्च साधन है। समता धर्म की ज्योति अन्दर और बाहर दोनों को आलौकित करती है। इस अवसर पर सामूहिक जप अनुष्ठान का कार्यक्रम भी रखा। जिसमें श्रावक-श्राविकाओं ने बड़े उत्साह से भाग लिया। मंगल भावना और स्तवन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।