संस्थाएं
महामांगलिक अनुष्ठान का आयोजन
नववर्ष नई उमंग, नई तरंग और नए संकल्पों की सौगात लेकर आता है। वीर निर्वाण संवत के नववर्ष की शुरुआत के अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, विजयनगर द्वारा आयोजित महामांगलिक अनुष्ठान में साध्वी संयमलता जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपों के इस पावन पर्व पर हमें अपने जीवन में नई रोशनी लानी है। हमारा प्रत्येक दिन नवप्रकाश से आलोकित हो और हम नववर्ष पर नई सोच व नवचिंतन के साथ ऐसा कुछ नवीन करें, जो जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल दे तथा सफलता का नया अध्याय रचे। अशुभ को त्यागकर शुभ को अपनाना ही सच्चे अर्थों में नववर्ष की मंगलकामना है। साध्वी मार्दवश्री जी ने कहा कि दीपावली का दीया निष्पृहता का प्रतीक है — वह रातभर जलता है, परंतु उसका कोई स्वार्थ नहीं होता। उसका उद्देश्य केवल यह होता है कि सूरज के आने तक व्यक्ति का प्रकाश पर विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि हमें अपने भीतर के प्रकाश को जगाकर शुभ भावों एवं सकारात्मक चिंतन के साथ नववर्ष का आरंभ करना चाहिए। साध्वीवृंद ने स्वरचित रचना “दीपों का पावन पर्व दीपावली” का मधुर संगान किया। अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत ने कहा — “अतीत को अनुभवों का खजाना बनाएं, भविष्य के लिए नए संकल्प सजाएं और वर्तमान को सुंदर बनाएं।” सभा अध्यक्ष मंगल कोचर ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएँ दी।