आचार्य श्री तुलसी का 112वां जन्म दिवस आयोजित

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मैसूर।

आचार्य श्री तुलसी का 112वां जन्म दिवस आयोजित

साध्वी सिद्धप्रभा जी ने आचार्य श्री तुलसी के जीवन का वर्णन करते हुए बताया गुरुदेव तुलसी ने पहले धर्मसंघ को और उसके बाद आचार्य पद को अपने जीवन में महत्व दिया। कई प्रकार के अवदान जैसे ज्ञानशाला, युवक परिषद, पारमार्थिक शिक्षण संस्था, आगम मंथन, नया मोड़, अणुव्रत का शंखनाद, प्रेक्षाध्यान साधना, श्रमण श्रेणी आदि गुरुदेव तुलसी की देन है। आचार्य तुलसी घोर विरोधों को भी विनोद के समान मानते थे। आचार्य तुलसी ने अपने जीवन काल में ही आचार्य पद का विसर्जन किया। हिंदी को धर्मसंघ में विशेष स्थान दिया। मुनि नथमल को महाप्रज्ञ बनाने में आचार्य तुलसी का ही हाथ है। आचार्य तुलसी संस्कार के निर्माण में बड़े जागरूक थे, वे आंख दिखाकर अनुशासन का पालन कराते तो दुलार से भी समझाते थे। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी आस्थाप्रभाजी के मंगलाचरण से हुआ। साध्वी मलययशा जी ने अपने भाव व्यक्त किये। युवक परिषद के अध्यक्ष प्रमोद मुणोत, महिला मंडल की अध्यक्षा विजयलक्ष्मी आच्छा, विक्रम पितलिया, विनोद मुणोत ने अपने भाव व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी दीक्षाप्रभा जी ने किया।