वर्धमान ओली तप अभिनंदन

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राजराजेश्वरी नगर।

वर्धमान ओली तप अभिनंदन

साध्वी पुण्ययशा जी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में वर्धमान ओली तप अभिनंदन का एक विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वीश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि विभिन्न प्रकार की तपस्याओं में आयम्बिल तप का एक विशेष महत्व होता है। आयम्बिल से कर्म निर्जरा के साथ-साथ विघ्न निवारण, उपद्रवों की उपशांति, आध्यात्मिक शक्तियों का जागरण तथा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक व्याधियों का शमन होता है। उन्होंने बताया कि लगातार आयम्बिल तपस्या के कारण द्वारिका नगरी की बारह वर्षों तक रक्षा होती रही। श्रीपाल का कुष्ठ रोग आयम्बिल तप के प्रभाव से ठीक हुआ। राजा श्रेणिक और श्रीकृष्ण की अनेक रानियों ने भी दीर्घकाल तक आयम्बिल तप किया। तेरापंथ धर्मसंघ में साध्वी मीरां जी ने 13 माह तक आयम्बिल तप किया था, वहीं मुनि श्री जीवोजी ने वर्धमान ओली तप पूरा किया — अर्थात एक आयम्बिल से सौ आयम्बिल तक लड़ीबद्ध तप किया।
इसी क्रम में श्रावक मनोहरलाल चावत ने 66 दिनों तक आयम्बिल तप कर वर्धमान ओली तप की बीस, इक्कीस और बाईस दिन की तीन लडियाँ एक साथ संपन्न कीं। राजाराजेश्वरी नगर के श्रावक समाज ने मनोहरलाल चावत के 66 दिन के तप की अनुमोदना करते हुए सामूहिक रूप से 66 आयम्बिल का आयोजन किया। इस अवसर पर तपस्वी भाई मनोहरलाल ने जीवनभर स्वर्ण-चाँदी के आभूषण न पहनने का संकल्प लिया तथा पत्नी दीपा चावत सहित सजोड़े ब्रह्मचर्य व्रत की साधना स्वीकार की। साध्वी विनितयशा जी ने आयम्बिल तप की महत्ता को उजागर करते हुए तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साध्वी वर्धमानयशा जी और साध्वी बोधिप्रभा जी ने गीतिका के माध्यम से तप-अनुमोदना प्रस्तुत की। सभा की उपाध्यक्ष सरोज बैद ने स्वागत एवं तप-अभिनंदन वक्तव्य दिया। तेरापंथी सभा, युवक परिषद, महिला मंडल तथा परिवार के सदस्यों ने तप-गीत द्वारा और सभाध्यक्ष राकेश छाजेड़, सुरेश दक एवं निर्मल चावत ने तप-अनुमोदना वक्तव्य देकर तपस्वी का सम्मान किया। मनोज डागा ने साध्वीप्रमुखाश्री जी द्वारा प्रेषित तप-अनुमोदना पत्र का वाचन किया। तेरापंथी सभा, तेयुप एवं महिला मंडल ने तप अभिनंदन पत्र और जैन पट्ट भेंट कर तपस्वी का सम्मान किया। कार्यक्रम का सुंदर मंच संचालन वंदना भंसाली ने किया।