ज्ञानार्जन के माध्यम से मन पर रखें  नियंत्रण : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

घोड़ाघाटी। 28 नवम्बर, 2025

ज्ञानार्जन के माध्यम से मन पर रखें नियंत्रण : आचार्यश्री महाश्रमण

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी मेवाड़ की धरा को पावन करते हुए नेगड़िया ग्राम से प्रातःकालीन विहार कर घोड़ाघाटी स्थित श्री मदन विहार धाम पधारे। मदन विहार धाम में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्य प्रवर ने फरमाया कि आगम वाङ्मय में विविध विषय प्राप्त होते हैं। आगम वाङ्मय में वर्णित घटना-प्रसंगों के माध्यम से आध्यात्म की प्रेरणा भी प्राप्त की जा सकती है और आध्यात्मिक साधना भी की जा सकती है। साथ ही यह जगत क्या है, इसकी जानकारी भी द्रव्यों के संदर्भ में आगमों से प्राप्त होती है।
आगम साहित्य में परिसंवादों के माध्यम से भी ज्ञान की उत्तम बातें समझाई गई हैं। उत्तराध्ययन आगम के तेईसवें अध्याय में दो ज्ञानी व्यक्तियों का परिसंवाद मिलता है—पार्श्व-परंपरा के मुनि कुमार श्रमण केशी और महावीर-परंपरा के गौतम स्वामी के बीच वार्तालाप। दो ज्ञानियों के बीच ऐसा परिसंवाद अन्य अनभिज्ञ व्यक्तियों को भी श्रेष्ठ ज्ञान प्रदान कर सकता है। मुनि कुमार श्रमण केशी ने प्रश्न किया— 'गौतम! तुम इस मनरूपी दुष्ट अश्व पर आरूढ़ हो, तो क्या यह अश्व तुम्हें उन्मार्ग पर नहीं ले जाता?'
गौतम स्वामी ने उत्तर दिया— 'मैं इस मनरूपी अश्व को श्रुतरूपी लगाम से नियंत्रण में रखता हूँ; अतः यह मुझे स्वेच्छा से कहीं नहीं ले जा सकता।'
मन को दुष्ट अश्व कहा गया है, परन्तु इसे उत्तम कोटि का अश्व भी बनाया जा सकता है। मन में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के विचार आ सकते हैं। मनुष्य को चाहिए कि ज्ञानार्जन के माध्यम से अपने मन पर नियंत्रण रखने का प्रयास करे। अध्यात्म की साधना, प्रेक्षा-ध्यान आदि के माध्यम से मन की चंचलता को कम किया जा सकता है, क्योंकि यही चंचलता मन को दुष्ट बना सकती है। अतः मन की चंचलता कम कर मन को उत्कृष्ट बनाने का प्रयास आवश्यक है। आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि हम नाथद्वारा की ओर जा रहे हैं और नाथद्वारा से पूर्व स्थानकवासी परंपरा के इस मदन विहार में आए हैं। आचार्य शिवमुनि जी से और अन्य मुनियों से भी अनेक बार मुलाकात हुई है। स्थानकवासी समाज में भी उत्तम धार्मिक-आध्यात्मिक साधना चलती रहे। विहार धाम के अध्यक्ष मांगीलाल लोढ़ा ने आचार्य प्रवर के स्वागत में अपने विचार रखे।