गुरुवाणी/ केन्द्र
समय का हो उत्कृष्ट सदुपयोग : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ नाथद्वारा पधारे। समुपस्थित श्रद्धालुओं को आर्हत् वांग्मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि हमारे जीवन में समय का बहुत महत्त्व होता है। समय एक प्रकार का धन है। इस धन का आदमी क्या उपयोग करता है, यह एक ध्यातव्य बात है। समय का सदुपयोग भी किया जा सकता है, दुरुपयोग भी, और अनुपयोग भी हो सकता है। अच्छे कार्यों में समय का नियोजन किया जाए तो समय का सदुपयोग हो जाता है। हिंसा, झूठ, धोखाधड़ी आदि बुरे कार्यों में समय लगाया जाए तो समय का दुरुपयोग होता है। और आदमी आलस्यवश कोई कार्य ही न करे, तो वह समय का अनुपयोग बन जाता है।
आदमी को चाहिए कि वह समय का बढ़िया धार्मिक-आध्यात्मिक उपयोग करे। बुरे कार्यों, बुरे विचारों और बुरी योजनाओं में अपना समय न लगाए। और कुछ भी न करना भी उत्तम नहीं है। समय का अच्छा उपयोग किया जाए तो जीवन में समय का सार्थक उपयोग संभव है। समय के लिए किसी प्रकार का धन लगाने की आवश्यकता नहीं होती। प्रतिदिन के 24 घंटे सभी को समान रूप से मिलते हैं। इस समय का कौन व्यक्ति कितना विवेकपूर्ण उपयोग करता है, यही महत्त्वपूर्ण होता है। धर्मग्रंथों में चौरासी लाख जीवयोनियाँ बताई गई हैं। उनमें यह मानव जीवन दुर्लभ भी है और महत्त्वपूर्ण भी। इस मानव जीवन में साधना करके मोक्ष तक पहुँचा जा सकता है। किसी अन्य योनि से मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। अतः इस मानव जन्म में हमें समय का उत्कृष्ट उपयोग करना चाहिए।
आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि आज नाथद्वारा आना हुआ है। हमारे प्रथम गुरु आचार्य श्री भिक्षु के जन्म का त्रिशताब्दी वर्ष भी चल रहा है। आगे हमें कंटालिया, सिरियारी आदि स्थलों पर भी जाना है। यहाँ के लोगों में उत्तम धार्मिक और आध्यात्मिक भाव बने रहें। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। राजस्थान के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी पूज्य प्रवर की मंगल सन्निधि में उपस्थित हुए। आचार्य प्रवर के स्वागत में अभिवंदना की और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। तेरापंथ महिला मंडल नाथद्वारा ने गीत का संगान किया। स्थानीय सभा अध्यक्ष विश्वजीत सिंह कर्णावट और रमेश सोनी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। नाथद्वारा ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमार जी ने किया।