कषाय मंदता है ध्यान की सबसे बड़ी निष्पत्ति : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

उदयपुर। 26 नवम्बर, 2025

कषाय मंदता है ध्यान की सबसे बड़ी निष्पत्ति : आचार्यश्री महाश्रमण

महासूर्य, तीर्थंकर के प्रतिनिधि महातपस्वी युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आर्हत वाणी के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि ध्यान भी एक साधना है। परम पूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी द्वारा प्रेक्षाध्यान के अंतर्गत किए गए प्रयोग जैसे कायोत्सर्ग, दीर्घश्वास प्रेक्षा, समवृत्ति श्वास प्रेक्षा, चैतन्य केन्द्र प्रेक्षा आदि विशेष महत्व रखते हैं। कषाय मंदता ध्यान की सबसे बड़ी निष्पत्ति है। यद्यपि ध्यान के अन्य लाभ भी हो सकते हैं, परंतु अहिंसा की चेतना का विकास और समता की साधना ध्यान के प्रमुख लाभ हैं। क्रोध, मान, माया, लोभ आदि कषाय क्षीण होने चाहिए। सामायिक भी एक उत्तम साधना है। सामायिक में ध्यान, स्वाध्याय, आत्मचिंतन आदि कई प्रयोग किए जा सकते हैं। साधु का सर्वविरति रूप जीवन भर की सामायिक होता है। साधुत्व एक अनमोल रत्न है। श्रावकों को भी अपने दैनिक कार्यक्रम में प्रतिदिन एक सामायिक का प्रयास करना चाहिए, इससे उनके जीवन का क्रम बहुत अच्छा हो सकता है।
मानव जीवन में कुल सात व्यसन बताए गए हैं, जिनमें एक व्यसन हिंसा करना है। साधु तो सदुपदेश देने वाले होते हैं। साधु हिंसा का त्याग कर अहिंसा का आचरण करते हैं। ऐसे अहिंसामूर्ति और त्यागमूर्ति साधुओं के मात्र मुखदर्शन से ही पाप झड़ते हैं और पुण्य का बंध होता है। यदि ऐसे साधु सदुपदेश दें कि प्राणियों की हिंसा से बचने का प्रयास किया जाए और कोई हिंसा का परित्याग कर दे, तो उसके जीवन में अच्छा परिवर्तन आ सकता है। साधु में संयम-साधना हो तो वही उसकी वास्तविक संपत्ति होती है। ऐसे साधु को देवता भी नमस्कार करते हैं। आचार्यश्री ने आगे कहा कि आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की चातुर्मास स्थली में हमारा आगमन हुआ है और जिस मंच से आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने प्रवचन दिया था, वहीं आज हमारा प्रवचन हो रहा है। हमारे पूर्वाचार्यों द्वारा जो संदेश, निर्देश और उपदेश दिए गए हैं, उन्हें यथासंभव ध्यान में रखते हुए उनका अनुपालन करने का प्रयास होना चाहिए। यहां की जनता में अच्छी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां निरंतर चलती रहें। आने वाले साधु-साध्वियों से उत्तम आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ लेते रहना चाहिए।
दो चातुर्मास के उपरांत आचार्यश्री के दर्शन करने वाली साध्वी उज्जवलप्रभा जी ने अपने उद्गार व्यक्त किये तथा सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। दिगंबर जैन समाज की ओर से तरुण सागर, चातुर्मास समिति के संयोजक विनोद जैन, महावीर स्वाध्याय समिति के अध्यक्ष प्रकाश जैन, अणुव्रत समिति की अध्यक्ष प्रणिता जैन, टी.पी.एफ. के अध्यक्ष राजेंद्र चंडालिया, स्थानीय तेरापंथी सभा के सभाध्यक्ष कमल नाहटा, धीरेन्द्र मेहता आदि ने अपनी अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला की प्रशिक्षक और प्रशिक्षिकाओं ने सामूहिक रूप से गीत का संगान किया। लक्ष्मण कर्णावट ने अपनी आत्मकथा को श्रीचरणों में लोकार्पित किया। आचार्य श्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। राजस्थान सरकार में जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमार जी ने किया।