गुरुवाणी/ केन्द्र
संयम के विकास से होगी भीतरी सुख की प्राप्ति : आचार्यश्री महाश्रमण
अध्यात्म जगत के महासूर्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आर्हत वांग्मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए कहा कि व्यक्ति सुख प्राप्त करना चाहता है। केवल व्यक्ति ही नहीं, छोटे-छोटे प्राणी भी सुख की इच्छा रखते हैं। दशवैकालिक आगम में सुखी बनने के कई सूत्र प्रस्तुत किए गए हैं। पहला सूत्र है - अपने आप को तपाओ। जो व्यक्ति सुविधावादी मनोवृत्ति वाला होता है और थोड़ी-सी कठिनाई भी सहन नहीं कर पाता, वह सुकुमार बना रहता है। ऐसे व्यक्ति के लिए छोटी-सी कठिनाई भी बहुत बड़ी बन सकती है। जबकि जिसे कठोर जीवन जीने का अभ्यास होता है, वह जीवन की कठिनाइयों की अधिक परवाह नहीं करता। अतः कठिनाइयों को सहन करने की मनोवृत्ति का विकास करना चाहिए।
हमारे साधु-साध्वियां सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम में भी विहार करते हैं। सावधानी रखी जा सकती है, किन्तु कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए और अपने पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जीवन में जितना त्याग और संयम का विकास होगा, उतना ही भीतरी सुख की प्राप्ति होगी। जहां राग-द्वेष, असंयम और असहिष्णुता होती है, वहां अशांति और दुःख उत्पन्न होते हैं। जहां योग, त्याग और संयम होता है, वहां सुख की प्राप्ति होती है।
आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि इसी स्थल पर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने वर्षावास किया था। आचार्य महाप्रज्ञ जी का व्यक्तित्व और कर्तृत्व अत्यंत विराट रहा है। उदयपुर शहर में हमारा आगमन हुआ है। यहां के लोगों में भक्ति-भावना बनी रहनी चाहिए। इस क्षेत्र में आज साध्वीप्रमुखा जी, मुख्यमुनि और साध्वीवर्या नए रूप में आए हैं। यह स्थान मुनि मधुकर जी स्वामी से भी जुड़ा रहा है। यहां की जनता में धार्मिक भावना निरंतर बनी रहनी चाहिए।
पूज्य प्रवर के मंगल प्रवचन के उपरांत साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव उदयपुर में पधारे हैं। पूज्य गुरुदेव पुष्कलावर्त मेघ के समान हैं, जिनके एक बार बरसने से धरती दस हजार वर्ष तक स्निग्ध बनी रहती है। गुरुदेव की अमृत देशना रूपी अध्यात्म वर्षा से उदयपुर की यह धरती भी सहस्रों वर्षों तक स्निग्ध और उर्वर बनी रहेगी। उदयपुर में आचार्य श्री तुलसी पधारे थे, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने यहां चातुर्मास किया था, और परम पूज्य गुरुदेव श्री महाश्रमण जी भी आचार्य बनने के बाद दूसरी बार यहां पधारे हैं। आचार्य प्रवर की तेजस्विता, प्रज्ञा और तप के बल पर आज यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए हैं।
साध्वीप्रमुखाश्री के उद्बोधन के पश्चात तेरापंथी सभा उदयपुर के अध्यक्ष कमल नाहटा, मंत्री अभिषेक पोखरणा और तेयुप अध्यक्ष अशोक चौरड़िया ने अपनी अभिव्यक्ति दी। उदयपुर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी। तेरापंथ युवक परिषद उदयपुर ने गीत के माध्यम से आचार्य प्रवर की अभिवंदना की। तेरापंथ महिला मंडल और तेरापंथ कन्या मंडल ने भी पृथक-पृथक गीत प्रस्तुत किए। बजरंग जैन ने भी गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।