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तप अभिनंदन कार्यक्रम' एवं 'शक्ति सलोनी' का काव्यपाठ
तेरापंथ भवन राजराजेश्वरी नगर में दो विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कवयित्री शक्ति सलोनी का काव्य पाठ एवं दो कन्याओं का तप अभिनंदन। साध्वी पुण्ययशाजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कुछ-कुछ अद्भूत क्षमताएं होती है। सत् पुरुषार्थ के द्वारा उन क्षमताओं को परख कर उनमें निष्णात बना जा सकता है। कवित्व शक्ति का संबंध हमारी सृजन क्षमता से जुड़ा है। कवयित्री शक्ति सलोनी की कविताओं में क्रांति और वीर रस का अद्भूत संगम देखने को मिलता है। बिना देखे धाराप्रवाह सम-सामयिक विषयों को अध्यात्म के साथ प्रखर कवित्व के रूप में प्रस्तुत करना वास्तव में बेजोड़ कला है। ऐसा लग रहा है मानो सरस्वती कंठो में विराजमान है। ये आगे प्रगति करती रहे ऐसी मंगलकामना है। 'जब तक हिंदुस्तान है, जिंदा हिंदी का सम्मान रहेगा', 'वो होते भाग्यशाली जिनके घर बेटी जन्मती है', 'गर्व से सीना ठोक के बोलो हाँ हम जैनी श्रावक है' जैसी कविताओं से बहुत ही सुंदर वातावरण का निर्माण हुआ। साध्वीश्री जी ने ज्ञानशाला की 2 दस वर्षीय नन्ही बालाओं के बियासन तप की अनुमोदना करते हुए कहा सुश्री चहल कटारिया के 101 बियासन तथा जेसल मांडोत के 52 दिन के बियासन सानंद संपन्नता की ओर गतिमान हैं। छोटी-छोटी कन्याओ के प्रबल मनोबल और हिम्मत का परिचय दिया है। इस तपस्या के क्षेत्र में ये आगे बढ़े और नया कीर्तिमान जोडे । इनके साथ इनकी दादी-नानी श्रीमति पुष्पा कटारिया ने अपनी पौत्री और दोहित्री के साथ 116 बियासन किये है। सभी का तप आगे प्रवर्धमान रहे। सभाध्यक्ष राकेश जी छाजेड़ ने एक अभिनव अनुभव बताया। तेयुप से सहमंत्री महेश मांडोत, तेममं अध्यक्ष मंजु बोथरा ने भावाभिव्यक्ति दी। परिवार द्वारा गीतिका प्रस्तुत की गई। दोनों बच्चियों ने गीत द्वारा गुरुदेव के प्रति अपनी भावना व्यक्त की। कवयित्री एवं तपस्वियों को सम्मानित किया गया। मंच संचालन तेयुप अध्यक्ष विक्रम महेर ने आभार सुरेश जी दक ने व्यक्त किया।