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प्रेक्षा प्रशिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष की सम्पन्नता पर प्रेक्षा प्रशिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन ईस्ट जोन प्रेक्षा प्रशिक्षक वर्ग एवं जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा (कलकत्ता-पूर्वान्चल) ट्रस्ट द्वारा भिक्षु विहार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- मन को साधने का सर्वोत्तम उपाय है- ध्यान। ध्यान जीवन में संयम लाता है। वह एक नियंत्रण है, ब्रेक है। अपनी आवश्यकता, अपनी इच्छा, और अपने भोग पर नियंत्रण की बात ध्यान से फलित होती है। इसलिए ध्यान जीवन की बहुत बड़ी आवश्यकता व अनिवार्यता है। प्रेक्षाध्यान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का जगत को कल्याणकारी अवदान है। प्रेक्षाध्यान की साधना निष्काम धर्म और अनासक्त की साधना है।
ध्यान का अर्थ विचारों को रोकना नहीं है। उसका अर्थ है भावों को बदलना। खुद को पहचानने की प्रकिया है-ध्यान। परम पूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञजी ने प्रेक्षाध्यान पद्धति का आविष्कार किया। प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों से मानसिक तनावों से मुक्ति, आत्मिक शांति व चित्त की निर्मलता प्राप्त होती है। प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष में आचार्य श्री महाश्रमणजी के मार्गदर्शन में प्रेक्षा फाउंडेशन के अंतर्गत ईस्ट जोन में अच्छा कार्य हुआ। ईस्ट जोन कोर्डिनेटर मंजू सिपानी और बृहत्तर कोलकाता के सभी प्रशिक्षक व प्रशिक्षिकाओं का प्रेक्षाध्यान के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा सभी साधुवाद के पात्र है। इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेक्षा प्रशिक्षकों द्वारा मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण श्रीमती सुधा जैन ने दिया। हावड़ा प्रेक्षा प्रशिक्षिकाओं द्वारा लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। रश्मि सुराणा व श्रीमती प्रियंका डागा ने कविता प्रस्तुत की। ईस्ट जोन कोर्डिनेटर मंजू मिपानी ने प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष में हुए कार्यो की रिपोर्ट प्रस्तुत की। पूर्वांचल सभा के अध्यक्ष संजय सिंधी, साउथ सभा के अध्यक्ष विनोद चोरड़िया पूर्व मंत्री कमल ठिया, सॉल्टलेक सभा के मंत्री अशोक भूतोड़िया ने अपने विचार व्यक्त किये। आभार ज्ञापन अरुणजी नाहटा ने किया। सभी प्रेक्षा प्रशिक्षकों को मोमेंटो से सम्मानित किया गया।