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वृहद मंगल पाठ कार्यक्रम का आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में दीपावली के शुभदिन प्रवचन कार्यक्रम व वृहद मंगलपाठ का भव्य आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा (कलकत्ता-पूर्वाचल) ट्रस्ट द्वारा भिक्षु विहार में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - भारतीय संस्कृति में दीपावली पर्व का बहुत बड़ा महत्त्व है। दीपावली अर्थात् आलोक का विस्तार। पराजित अमावस्या का उच्छ्वास, घोर अंधकार का पलायन, आलोक सुरसरिता का धरती पर अवतरणा। आकाश के अनंत नक्षत्र मंडल से घरा की मूर्तिमान स्पर्धा है। दीपावली का पर्व ज्योति का, प्रकाश का, पुरुषार्थ का आत्मनिरीक्षण का दिव्यता का पर्व है। दीप प्रकाश का एक प्रतीक है। आदमी को अंधकार नहीं प्रकाश चाहिए मुनि ने आगे कहा- व्यक्ति के बाहर की सफाई पर ज्यादा ध्यान देता है, उससे अधिक भीतर की सफाई पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भीतर की सफाई ज्ञान रूपी प्रकाश से ही संभव है। मुनि ने आगे कहा दीपावली जागृति का पर्व है। त्याग, तप, संयम का पर्व है। पर्व आमोद-प्रमोद का साधन न बने। दीपावली का यह पर्व भगवान महावीर, भगवान राम तथागत बुद्ध दयानंद सरस्वती से जुड़ा हुआ है। दीपावली का संबंध लक्ष्मी से भी जुड़ा हुआ है। व्यक्ति लक्ष्मी संपन्न बनना चाहता है। लक्ष्मी का एक अर्थ है आभा, व्यक्ति आभा संपन्न बने व्यक्ति को हमेशा मंगल की कामना करनी चाहिए। आतिशबाजी से बचे। इससे पर्यावरण दूषित होता है। कितनी हिंसा होती है। मुनि परमानंद ने कहा दीपावली प्रकाश, स्वच्छता व समृद्धि का पर्व है। व्यक्ति के भीतर ज्ञान का प्रकाश, बुराइयों की सफाई व सद्गुणों की समृद्धि होने से ही दीपावली मानना सार्थक हो सकेगा। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। रात्रि में दीपावली बृहद्ध, मंगल पाठ कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमे मुनि जिनेश कुमार जी ने आध्यात्मिक अनुष्ठान कर बृहद्ध मंगल पाठ श्रद्धालुओं को सुनाया। बृहद्ध मंगल पाठ श्रवण करने हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।