आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

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सिकंदराबाद

आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

गणाधिपति आचार्यश्री तुलसी के 112वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर अणुव्रत दिवस का भव्य आयोजन किया गया। मानव को आचार्य तुलसी की देन का आयोजन युगप्रधान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाजीश्री जी ठाणा -4 के सान्निध्य में तेरापन्थ भवन, डी वी कॉलोनी, सिकंदराबाद में हुआ। डॉ. साध्वी गवेषणाश्री ने कहा- आचार्य श्री तुलसी की जीवन-गाथा भारतीय चेतना का एक अभिनव उन्मेष है, आश्चर्यों की वर्णमाला से आलोकित एक महालेख है। आपने समाज में अनेक नये उन्मेष व नये आयाम दिये है। धार्मिक जगत के इतिहास में एक नया कीर्तिमान आपने स्थापित किया, उसमें एक है - अपने पद का विसर्जन।
विसर्जन धन का, समय का, ज्ञान का, वस्तु का अनेक प्रकार का हो सकता है किन्तु सारी सक्षमता होते हुए आपके द्वारा पद का विसर्जन करना बहुत बड़ी बात है। विश्व के इतिहास में प्रत्येक दशक नवीनता लिये था |11 वर्ष की उम्र में दीक्षा 22 में आचार्य पद तीसरे दशक में अणुव्रत का प्रारंभ , मुमुक्षु का ट्रैगिंन सेन्टर, चतुर्थ दशक में साध्वियों की शिक्षा, आगम संपादन, आदर्श संघ का उद्भवI पंचम दशक में - जैन विश्व भारती तथा साध्वीप्रमुखा का चयन, छठम् दशक में समणी दीक्षा तथा युवाचार्य का चयन सातवे दशक में जैन युनिवर्सिटी व योग क्षेम वर्ष । सचमुच में 62वर्षीय आचार्य काल यशस्वी, तेजस्वी रहा तथा तेरापंथ संघ को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की। साध्वी मयंक प्रभा ने कहा - विश्व के इतिहास में इन शताब्दियों का दुर्लभ व्यक्तित्व है - आचार्य श्री तुलसी । आचार्य श्री तुलसी का व्यक्तित्व और कर्तृत्व अमाप्य है। जिसे शब्दों में बांधना और गीतों में उकेरना असंभव है। साध्वी मेरुप्रभाजी ने 'सांसों में तुलसी का नाम' गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी दक्षप्रभा ने भी सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की तथा मंच की कुशलता पूर्ण संचालन किया। अणुव्रत समिति के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरु‌वात हुई| चांद बाई बैद, शान्ता बाई ने भावपूर्ण गीतिका का संगान किया, महिला मंडल मंत्री निशा सेठिया, सभा मंत्री हेमन्त संचेती , टी पी एफ अध्यक्ष विरेन्द्र घोषल ने आचार्य श्री तुलसी के व्यक्तित्व-कर्तृत्व को उजागर किया|