आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

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जोरावरपुरा

आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमण जी सुशिष्या शासन श्री साध्वी बसंत प्रभा जी आदि ठाणा - 4 के सानिध्य में आचार्य श्री तुलसी का जन्म दिवस मनाया गया । साध्वी श्री बसंतप्रभा जी ने कहा जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के नौवें आचार्य थे, जिनका जन्म 20 अक्टूबर 1914 को राजस्थान के लाडनूं में हुआ था। उन्होंने दीक्षा 5 दिसंबर 1925 को 11 साल की उम्र में, अपने गुरु अष्टम आचार्य श्री कालूगणी के मार्गदर्शन में, उन्होंने दीक्षा ग्रहण कि और उन्हें 22 वर्ष की अल्प आयु में ही तेरापंथ धर्म संघ का आचार्य पद को सुशोभित किया ।जिन्होंने 1949 में अणुव्रत आंदोलन की शुरुआत की और जैन विश्व भारती संस्थान की स्थापना की। उनका जीवन मानवता के कल्याण और अहिंसा के संदेश को समर्पित था, और उन्हें अपनी अद्भुत नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता के लिए जाना जाता है।एक बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी आचार्य श्री तुलसी ने 100 से अधिक पुस्तकों के लेखक किया और एक महान समाज सुधारक थे, जिन्होंने 776 से अधिक साधु-साध्वियों को दीक्षा दी। उन्होंने मानव कल्याण के लिए अणुव्रत, जीवन विज्ञान और प्रेक्षाध्यान जैसी शिक्षाओं का प्रवर्तन किया। साध्वी संकल्प श्री ने भी आचार्य श्री तुलसी की महिमा का वर्णन करते हुआ कहा आचार्य श्री तुलसी वो महान विभूति जिन्होंने समाज उत्थान के लिए अनेकों कार्य किए । आचार्य तुलसी ने महिला वर्ग को आगे लाने के लिए घूंघट प्रथा को खत्म किया। आचार्य तुलसी की देने से ही आज नारी शक्ति देश के विभिन्न स्थानों पर अव्वलता के साथ काम कर रही है । दहेज प्रथा, जाति भेद भाव, छुआछूत, मृत्यु भोज आदि सभी कुरीतियों से समाज को छुटकारा मिला । साध्वी कल्पमाला जी और साध्वी रोहित यशा ने गीतिका का संगान किया और आचार्य श्री तुलसी के जीवन पर प्रकाश डालते हुआ उनके जीवन के बारे में बताया । बाबूलाल और सुरेंद्र कुमार बुच्चा ने भी गीतिका का संगान कर आचार्य श्री तुलसी के प्रति अपनी भावना से श्रद्धा सुमन अर्पित किए।