गुरुवाणी/ केन्द्र
हर कार्य को पूरी एकाग्रता से करना भी एक प्रकार का ध्यान है : आचार्यश्री महाश्रमण
राजस्थान के मारवाड़ संभाग के पाली जिले को पावन बनाने के लिए गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण ने सोमवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में मगरतालाब से प्रस्थान किया और पधारे। मार्ग में एक स्थान पर श्रीराम चौक से खिंवाड़ कृषि मंडी की ओर जाने वाले मार्ग का नामकरण ‘आचार्य श्री महाश्रमण’ मार्ग किया गया। आचार्य श्री ने वहां पधार कर मंगल पाठ का उच्चारण किया और भव्य जुलूस के साथ तेरापंथ भवन पधारे।
यहां बने ‘महावीर भिक्षु समवसरण’ में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में आर्हत् वाड.मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि ध्यान दुनिया में प्रसिद्व है। अनेक नामों से ध्यान, योग पद्धतियां चल रही है और अनेकानेक लोग ध्यान शिविरों में भाग लेते हैं अथवा ऑनलाइन कक्षाएं भी अटैण्ड करते हैं। ध्यान का हमारे जीवन में बड़ा महत्त्व है उसी प्रकार साधु धर्म में ध्यान का महत्त्व होता है। चित्र की एकाग्रता होती है और मन की अनपेक्षित चंचलता नहीं होती है तो कार्य अच्छा संपन्न हो सकता है।
विद्यार्थी विद्यालयों में पढ़ते हैं तो उनके भी पढ़ाई में अच्छी एकाग्रता होगी तो परिणाम अच्छा मिल सकेगा। प्रत्येक कार्य में ध्यान रखना अच्छा होता है। ‘ध्यान’ शब्द हमारे व्यवहार में भी प्रचुरता से प्रयुक्त होता है। शरीर की स्थिरता, वाणी का संयम और मन की एकाग्रता या निर्विन्वारता, ये तीनों स्थितियां एक साथ हैं तो वह बहुत अच्छा ध्यान हो जाता है। चलने में, भोजन करते समय, पढ़ाई-लिखाई के समय यदि भाव क्रिया होती है तो वह कुछ अंशों में एक प्रकार का ध्यान हो जाता है। पूज्य गुरुदेव ने विद्यार्थियों को ध्यान का प्रयोग भी करवाया।
हमारे धर्म संघ में नवम् आचार्य, आचार्य श्री तुलसी के समय ध्यान पद्धति प्रेक्षा ध्यान के नाम से शुरू हुई थी। आदमी आपने जीवन में ध्यान का अभ्यास करें। कार्यकरते समय भी ध्यान रहे, श्वास आदि का प्रयोग करें और जीवन में प्रत्येक कार्य को ध्यान से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। जो भी कार्य करें पूरी एकाग्रता उसी में रखने का प्रयास होना चाहिए।
आचार्य श्री के स्वागत में खिंवाड़ा तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री महेन्द्र खांटेड़ का निवर्तमान अध्यक्ष श्री अमृतलाल खांटेड़ ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल खिंवाडा ने स्वागत गीत का संगान किया। पाली के पूर्व विधायक श्री ज्ञानचंद पारख ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सरपंच श्रीपाल वैष्णव, एसडीएम श्रीमती शिवाश जोशी, व्यापार मंडल अध्यक्ष श्री कांति सुथार, श्री महेन्द्र बोहरा आदि ने आचार्य श्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।