गुरुवाणी/ केन्द्र
किसी पर झूठा कलंक लगाने का न करें प्रयास : आचार्यश्री महाश्रमण
मेवाड़ की धरा को अपने चरणों से पावन बना कर आध्यात्मिकता की ज्ञान गंगा प्रवाहित करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज दिवेर गांव से मंगल प्रस्थान किया और लगभग सोलह किमी का विहार परिसम्पन्न कर पाली जिले के कोट सोलंकियान गांव में स्थित जैन धर्म के एक भवन में पधारे। मारवाड़ के श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में ग्रामीण जनों ने आचार्य प्रवर का भाव भीना स्वागत किया।
प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को आगम वांग्मय के माध्यम से पावन देशना प्रदान करते हुए कहा कि जैन वांग्मय में अठारह पाप बतलाए गए हैं। उनमें एक पाप है- अभ्याख्यान, किसी पर झूठा आरोप लगा देना, बात में सच्चाई हो और फिर आरोप लगाएं तो यह कोई बुरी बात नहीं है। अपना अधिकार प्राप्त करने के लिए न्यायालय में भी जाया जा सकता है क्यों कि आप गृहस्थ हैं और समाज, परिवार की भूमिका में हैं। जो आदमी झूठा आरोप लगाता है, हो सकता है कि आगे के जन्मों में उसे भी झूठा आरोप झेलना पड़ लाए। अतः हमारे जीवन में हमें किसी पर भी झूठा कलंक लगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
आदमी को न अपने लिए न दूसरों के लिए, क्रोधवश, द्वेषवश, भयवश, झूठ नहीं बोलना चाहिए, जिससे किसी की हिंसा हो जाए, किसी को तकलीफ में पड़ना पड़े। साधु के तो तीन करण तीन योग से झूठ बोलने का त्याग होता है। अठारह पापों का सेवन साधु जीवन भर नहीं करता है। इस दृष्टि से साधु का जीवन बहुत उजला होता है। यद्यपि साधु से भी प्रमाद वश भूल हो सकती है। साधु का जीवन मिलना बहुत बड़ी बात होती है।
आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि कल पौष कृष्णा तीज है और इस दिन साध्वी कुन्दन रेखाजी व साध्वी आनंद प्रभाजी की दीक्षा के पचास वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। आगामी 9 दिसम्बर को गुरुदेव तुलसी की दीक्षा के एक सौ वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। दोनों साध्वियां दीक्षा के पचास वर्ष पूर्ण होने के पश्चात् आगम स्वाध्याय आदि जितना संभव हो सके, करने का प्रयास करें। कंठस्थ ज्ञान का चितारणा करें और चितारने के साथ-साथ अर्थ का भी चिंतन होता रहे। संयम में समिति, गुप्ति और महाव्रतों के प्रति जागरूकता रहे। संघ सेवा की भावना रहे।
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभाजी ने समुपस्थित जनता को संबोधित किया। कोट सलंकियान की ओर से श्री कुंदनमल कोठारी व श्री अमृतलाल गिड़िया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। गिड़िया परिवार की महिलाओं तथा जैन संघ की महिलाओं ने पृथक-पृथक स्वागत गीत का संगान किया। बालक आरव और मेहुल ने अपनी बाल सुलभ प्रस्तुति दी।