आदमी पद या कद से नहीं अपितु सद्गुणों से बड़ा बनता है : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाम्बोड़ी। 04 दिसंबर, 2025

आदमी पद या कद से नहीं अपितु सद्गुणों से बड़ा बनता है : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी आज प्रातः ‘धानिन’ से अपनी धवल सेना के साथ गतिमान हुए और लगभग 9 किमी. का विहार संपन्न कर लाम्बोड़ी गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यम. विद्यालय में पधारे। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और ग्रामीणजनों ने आचार्य का भावपूर्ण स्वागत किया। विद्यालय परिसर में प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में अर्हत् वाड.मय आधारित अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा कि मनुष्य जन्म को दुर्लभ बताया गया है। चौरासी लाख जीव योनियों में मानव जन्म मिलना मुश्किल और दुर्लभ बताया गया है। यह मानव जीवन वर्तमान में हमें उपलब्ध है। इस मानव जीवन में जो आदमी धर्म करता है, अध्यात्म की साधना करता है उसके लिए यह जीवन धन्य हो जाता है, कृतार्थ हो जाता है और बड़ा लाभ इस जीवन से प्राप्त हो सकता है। इस मानव जीवन में भी जो आदमी हिंसा, चोरी, धोखाधड़ी आदि पाप कार्य करता है, व्यसनों में आसक्त रहता है उसको पुनः कब मानव जीवन मिले और उसका कब कल्याण हो, कहना कठिन है। मनुष्य के पास पांच इंद्रियां है और मस्तिष्क है।
मनुष्य इस शरीर से जो साधना कर सकता है, वह साधना कोई दूसरा प्राणी नहीं कर सकता। जो व्यक्ति साधु बन जाता है, परिग्रह को छोड़ देता है, हिंसा आदि आश्रमों का त्याग कर दिया वह इस दुनिया का बड़ा आदमी बन जाता है। राजनीति, समाज आदि संदर्भों में भी कोई आदमी बड़ा आदमी हो सकता है परन्तु जो सद्गुणों से बड़ा है यह महत्त्वपूर्ण बात होती है। व्यक्ति में नम्रता, क्षमाशीलता आरध्य के प्रति भक्ति होना और स्वभाव अच्छा होना बड़े पन के लक्षण हैं। आज लाम्बेड़ी में साधु-सध्वियों और समणियों का संगम हुआ है, साथ में किसान सम्मेलन भी है।
किसान भी इंसान ही है। भारत एक कृषि प्रधान देश ह ैकिसानों मे धन के साथ-साथ जीवन में धर्म की भी धनाढ़यता भी होनी चाहिए। जीवन में अहिंसा, ईमानदारी रहे और नशामुक्ति रहे। शराब, बीड़ी-सिगरेट आदि का नशा न हो। किसान को अन्नदाता कहा जाता है। अन्न, पानी और सद्वचनों को रत्न कहा गया है। अतः अन्न के महत्त्व को भी ध्यान में रखने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य श्री ने चतुर्दशी के संदर्भ में हाजरी के क्रम को संपादित करते हुए चारित्रात्माओं में उपस्थित किसानों को पावन प्रेरणा करते हुए मदिरा पान का त्याग करवाय। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा को मंडल लाम्बेड़ी ने स्वागत गीत का संगान किया।
आचार्य प्रवर ने विद्यार्थियों को सद्भावना, नशामुक्ति व नैतिकता का संकल्प भी स्वीकार करवाय और मंगल संबोध प्रदान किया। स्थानीय विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि आचार्य श्री का शुभणमन होना बड़े सौभाग्य की बाता है। आप मेवा़ड़ क्षेत्र में चौदह वर्षों बाद राम के रूप मे पधारे हैं, हम सभी अब्योध्या वासियों के रूप में आपका स्वागत करते हैं। कुछ समय पश्चात् सायंकाल आचार्य प्रवर रात्रिकालीन प्रवासा हेतु विहार कर कितेला गांव में पधारे।