शरीर रूपी नौका से संसार रूपी समुद्र को तरने का प्रयास करें : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

दिवेर। 05 दिसंबर, 2025

शरीर रूपी नौका से संसार रूपी समुद्र को तरने का प्रयास करें : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिध, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज प्रातः कितेला गांव से मंगल विहार किया। मेवाड़ धरा को पावन बानते हुए पूज्य गुरुदेव अब मारवाड़ की ओर गतिमान हैं। लगभग 8 किमी. का विहार का गुरुदेव मादा की बरसी गांव पधारे। बहिर्विहार से पहुंचे मुनि श्री संजय कुमार जी आदि ढाणा 3 ने लगभग तीन वर्षों पश्चात् पूज्य गुरुदेव के दर्शन किए और दिवेर गांव लगभग 13 किमी. का विहार संपन्न कर पधारे। तेरापंथ भवन दिवेर में मंगल पादार्पण करतेे हुए गुरूदेव प्रवास स्थल राज. उच्च माध्यम. विद्या. दिवेर में पधारे।
विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम मे आर्हत् वाड.मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा कि शरीर एक नौका है जीव नाविक है यह संसार एक समुद्र है। महर्षि इस संसार रूपी समुद्र को शरीर रूपी नौ का सेतर जाते हैं। शरीर एक धर्म का साधन है तो शरीर पाप का साधन भी बन सकता है। जितना हो सके हमें शरीर धर्म का साधन बनाएं रखने का प्रयास करना चाहिए। मन और वचन भी धर्म के साधन बन सकते हैं पर शरीर है तो मन और वचन है। इस दृष्टि से शरीर की मुख्यता है। यह मानव जीवन अभी हमें प्राप्त है और जीवन बीत रहा है। इस शरीर रूपी नौका का हम जीवन में उपयोग करने का प्रयास करें।
जीवन में समस्याएं भी हो सकती है अतः जब तक शरीर की अक्षमता तीन रूपों में आ सकती है, पहला-बुढ़ापा। जब तक बुढ़ापा पीड़ित न करे तब तक धर्म का समाचरण कर लेना चाहिए। दूसरी बात है- व्याधि अर्थात् बीमारी। बीमारी लगने से भी सेवा कार्य आदि करने में समस्या हो सकती है। तीसरी बात इंद्रिय शक्ति की हीनता न हो, इंद्रियों के कमजोर पड़ जाने पर भी काम करने मे कठिनाई हो सकती है। अतः यह हमारा शरीर धर्म साधना में सक्षम हो तब तक काम आ सकता है।
जीवन मे साधुपन आ जाए और शरीर से साधना की जाए तो यह जीवन का बहुत बड़ा उपयोग है। साधुपन जीवन में आना बहुत बड़े भाग्य की बात है। अंतिम श्वांस तक साधुपन पालना जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है। अतः इस शरीर के द्वारा जितना हो सके उतनी धर्म की साधना, त्याग, तपस्या आदि करनें का प्रयास करना चाहिए।
यहां आज बालिकाएं भी आई है। बालिकाएं भी सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति को जीवन में उतारने का प्रयास करें। आज हमारा दिवेर गांव में आना हुआ है और यह मेवाड़ क्षेत्र की संभवतः अंतिम रात्रि है। दिवेर की जनता में खूब धार्मिक भावना बनी रहे। श्रावक भी दिवेर अथवा दिबेर से बाहर जहां कहीं भी रहें खूब अच्छा धार्मिक-आध्यात्मिक क्रम जीवन में बनाए रखें। आज तीन वर्षाें बाद मुनि श्री संजय कुमार जी स्वामी से मिलना हुआ है। तीनों भाईयों की ‘बन्धु त्रिपुटी’ और साथ में भतीजे भी है। खूब धर्म की प्रभावना करते रहें। दिवेर की जनता में खूब धार्णिक भावना बनी रहे, मंगला भावना। आज मेवाड़ स्तरीय मंगल भावना समारोह आयोजित हुआ जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। पूज्य गुरुदेव ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।